एक्शन: एमबीबीएस में दाखिला फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसआईटी गठित

एक्शन: एमबीबीएस में दाखिला फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसआईटी गठित
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देहरादून। एमबीबीएस में दाखिले के लिए कथित तौर पर फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने के मामले की जांच अब विशेष जांच दल (एसआईटी) करेगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की है। एसआईटी में सीओ सदर अंकित कंडारी, सीओ रायपुर वंदना वर्मा, थानाध्यक्ष क्लेमेनटाउन लोकपाल परमार, थानाध्यक्ष रायपुर संजीत कुमार और दोनों मुकदमों के विवेचक शामिल किए गए हैं।
एसआईटी सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी। पुलिस यह पता लगाएगी कि प्रमाणपत्र बनाने के लिए आख्या किस स्तर से तैयार हुई, उसमें कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए और इन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने वाला कौन था। इसके साथ ही दोनों मुकदमों में नामजद तृप्ति, उसकी मां उमा रानी तथा खुशी, परी और स्वाति से पूछताछ की जाएगी। आरोपितों से यह भी जानने का प्रयास होगा कि उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने की सलाह किसने दी थी।
पुलिस की अब तक की जांच में यह संकेत मिले हैं कि मामला केवल दो फर्जी प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं हो सकता। ऐसे में एसआईटी यह पता लगाएगी कि इस तरह के और कितने प्रमाणपत्र तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया। यदि जांच में किसी गिरोह की भूमिका सामने आती है तो उसके नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक भी पुलिस पहुंचने का प्रयास करेगी।
जांच के दायरे में उन कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) को भी लाया जाएगा, जहां से संबंधित प्रमाणपत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए। एसआईटी यह पता करेगी कि आवेदन किसने तैयार किए, दस्तावेज किसने अपलोड किए और आवेदकों को प्रमाणपत्र बनवाने में किसी व्यक्ति या संस्था ने सहायता की थी या नहीं।
स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए आवेदक को पहचान पत्र के अलावा स्वतंत्रता सेनानी का मूल प्रमाणपत्र या स्वतंत्रता सेनानी कार्ड, पेंशन पट्टा अथवा कोषागार से पेंशन प्राप्त होने का प्रमाण, निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता सेनानी के साथ संबंध दर्शाने वाला वंशावली प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होता है। एसआईटी इन सभी दस्तावेजों की सत्यता की जांच करेगी और यह भी पता लगाएगी कि कथित फर्जी दस्तावेज आखिर तैयार कहां से हुए।
प्रमाणपत्र तैयार करने की राजस्व प्रक्रिया भी जांच के केंद्र में रहेगी। संबंधित मामलों में राजस्व स्तर पर तैयार की गई आख्या, दस्तावेजों के सत्यापन और स्थलीय जांच की प्रक्रिया को खंगाला जाएगा। पुलिस यह पता लगाएगी कि आवेदकों के पते और उनके स्वतंत्रता सेनानी आश्रित होने के दावे का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।
मामला जिलाधिकारी कार्यालय के संज्ञान में आने के बाद हुई जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। तृप्ति की मां उमा रानी के नाम से प्रस्तुत आधार कार्ड में गड़बड़ी सामने आई थी। बताया गया कि आधार कार्ड में 11 अंकों का नंबर दर्ज था। शपथपत्र में उमा रानी का निवास मोथरोवाला स्थित दूधा देवी मंदिर दर्शाया गया था, लेकिन स्थलीय जांच और स्थानीय लोगों से पूछताछ में पता चला कि तृप्ति और उमा रानी का परिवार वहां कभी निवासरत नहीं रहा।
रायपुर क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला सामने आया। राजस्व उपनिरीक्षक कंडोली रायपुर जगदीश कुमार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार राजीव नगर, तरली कंडोली निवासी खुशी, परी और स्वाति ने एमबीबीएस में दाखिले के लिए स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने को ऑनलाइन आवेदन किया था। दस्तावेजों की जांच में उनके आधार कार्ड कूटरचित पाए गए। स्थलीय निरीक्षण में भी तीनों के संबंधित पते पर कभी निवासरत नहीं होने की बात सामने आई। जांच के आधार पर तीनों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया।
फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले तक मामला पहुंचने के बाद अब पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटेगी कि फर्जी प्रमाणपत्र केवल इन मामलों तक सीमित थे या इनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। प्रमाणपत्र तैयार कराने से लेकर ऑनलाइन आवेदन, राजस्व सत्यापन और एमबीबीएस दाखिले तक की पूरी कड़ी की जांच के बाद ही मामले में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका सामने आ सकेगी।

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