बड़ी ख़बर: पीए के ठिकाने पर कैश-ज्वैलरी की बरामदगी के बाद हरीश रावत ने की कांग्रेस के दो पद छोड़ने की पेशकश
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तत्कालीन सहयोगी और ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकाने से कथित तौर पर भारी नकदी, सोना और कीमती घड़ियां बरामद होने की खबर के बाद उत्तराखंड की राजनीति में नया उबाल आ गया है। भर्ती घोटाले से जुड़े करीब दस साल पुराने मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने जहां कांग्रेस को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए कांग्रेस के दो संगठनात्मक पदों से हटने की पेशकश कर दी है।
रावत ने कहा कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आनी चाहिए। इसके लिए वे उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से हटने को भी तैयार हैं।
“यदि गलती हुई है तो मैं लज्जित हूं, लेकिन आरोप पर विश्वास नहीं”
हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि टीवी पर खबरें आ रही हैं कि देहरादून में उनके पूर्व सहयोगी के पास भारी मात्रा में नकदी और ज्वैलरी बरामद हुई है। इस पूरे तथ्य का वास्तविक खुलासा जांच के बाद ही होगा। उन्होंने कहा कि चंदन सिंह जीना उनके ओएसडी रहे हैं और सरकार तथा संगठन में रहते हुए उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।
रावत ने कहा कि जीना एक विनम्र और काम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। हालांकि, यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ अथवा किसी अन्य प्रकार की गड़बड़ी में उनकी भूमिका सामने आती है और उसके प्रमाण उपलब्ध हैं, तो वह ऐसे कृत्य के लिए लज्जित होंगे। लेकिन फिलहाल उन्हें इस आरोप पर विश्वास नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के चुनाव में भारी दांव लगा हुआ है। वह पहले मजाक में कहा करते थे कि चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देगी।
रावत ने कहा कि इस बार उनके घर पर नहीं, बल्कि उनके एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नैरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने इसे चुनावी राजनीति के संदर्भ में देखने की बात कही, हालांकि साथ ही यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की वास्तविक गड़बड़ी हुई है तो कानून को अपना काम करना चाहिए।
हरीश रावत ने कहा कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस संगठन में दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रही है और उनकी वजह से इस संघर्ष की धार कमजोर नहीं होनी चाहिए।
इसी सोच के साथ उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सदस्यता और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से हटने की पेशकश की। रावत का यह कदम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्होंने एक ओर नैतिक जिम्मेदारी का संदेश दिया है, तो दूसरी ओर जांच एजेंसियों और विपक्ष के सामने खुली चुनौती भी रख दी है।
भर्ती प्रक्रिया पर बोले-हमारे कार्यकाल में 42 हजार से अधिक नियुक्तियां
पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन का बचाव करते हुए कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनके कार्यकाल में लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षाएं कराने के लिए बाध्य किया गया और विभिन्न विभागों में भर्ती बोर्ड गठित किए गए।
उन्होंने दावा किया कि उनके लगभग तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां हुईं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नियुक्तियों और परीक्षाओं की प्रक्रिया में यदि उनसे जाने-अनजाने कोई निर्णयगत चूक हुई हो, तो वह उसके लिए उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति के पास भर्ती प्रक्रिया में उनके हस्तक्षेप या संलिप्तता से जुड़े कोई ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें सीबीआई, ईडी अथवा राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि बड़े दायित्व पर बैठे व्यक्ति को भ्रष्ट प्रलोभनों से बचना चाहिए। यदि उनसे कोई चूक हुई है तो वह कानून के तहत दंड के पात्र हैं और कानून को उन्हें दंडित करना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यह है कि भर्ती घोटाले से जुड़ी कार्रवाई करीब दस साल बाद क्यों तेज हुई? यूकेएसएसएससी के तत्कालीन चेयरमैन और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन सहयोगी चंदन सिंह जीना जांच एजेंसियों की नजर से कैसे बचे रहे?
यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि भर्ती घोटाले की जांच पहले से चल रही थी और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ हुई थी, तो जीना की भूमिका या उनके ठिकानों तक जांच एजेंसियां पहले क्यों नहीं पहुंचीं?
बरामद नकदी को लेकर भी उठे सवाल
मामले में कथित तौर पर बरामद 32 लाख रुपये की नकदी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि यह रकम दस वर्ष पुराने भर्ती घोटाले से जुड़ी है, तो क्या यह राशि इतने लंबे समय तक सुरक्षित रखी गई थी? क्या जांच एजेंसियों को पहले इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर इस मामले में जांच की दिशा और गति को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं?
दस साल पुराने मामले में चुनावी वर्ष से ठीक पहले कार्रवाई होने के कारण राजनीतिक गलियारों में इसके समय और उद्देश्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, बरामदगी और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
रावत ने गेंद जांच एजेंसियों और विपक्ष के पाले में डाली
हरीश रावत ने इस्तीफा देकर एक तरह से राजनीतिक नैतिकता का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी किसी चूक से राज्य के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा है तो वह जनता से माफी मांगते हैं और कानून के समक्ष दंड भुगतने को तैयार हैं।
अब देखना यह होगा कि ईडी की कार्रवाई आगे किस दिशा में बढ़ती है, क्या चंदन सिंह जीना से पूछताछ के बाद तत्कालीन सत्ता-तंत्र तक जांच की आंच पहुंचती है और क्या भर्ती घोटाले की फाइल में नए नाम सामने आते हैं। फिलहाल, हरीश रावत के इस्तीफे ने इस पुराने मामले को उत्तराखंड की चुनावी राजनीति के केंद्र में जरूर ला दिया है।

