एम्स: हुनरमंद डॉक्टरों ने किया कमाल, धड़कते दिल की सर्जरी कर के बचा ली 21 वर्षीय युवक की जान

एम्स: हुनरमंद डॉक्टरों ने किया कमाल, धड़कते दिल की सर्जरी कर के बचा ली 21 वर्षीय युवक की जान
Spread the love

 

नुकीली वस्तु से दिल में लगी थी गहरी चोट, बिना हार्ट-लंग मशीन के की गई जटिल ऑफ-पंप सर्जरी

ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा विशेषज्ञों ने नुकीली वस्तु से दिल में लगी गंभीर चोट (पेनिट्रेटिंग कार्डियक इंजरी) के एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण मामले में धड़कते दिल के साथ सफल सर्जरी कर 21 वर्षीय युवक की जान बचाई। चिकित्सीय भाषा में इसे ऑफ-पंप कार्डियक सर्जरी कहा जाता है। संस्थान के अनुसार, उत्तराखंड में ट्रॉमा के लिए इस तरह की यह पहली ऑफ-पंप कार्डियक सर्जरी है।
श्यामपुर निवासी 21 वर्षीय अखिल सती को उनके पिता ने 27 अगस्त की मध्यरात्रि गंभीर अवस्था में एम्स की ट्रॉमा इमरजेंसी में भर्ती कराया था। युवक के दिल में किसी नुकीली वस्तु से गहरी चोट लगी थी और उसका रक्तचाप बेहद कम हो चुका था। दिल के फटने से उत्पन्न स्थिति में हर गुजरता मिनट जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।
ट्रॉमा सर्जरी विभाग के सर्जन डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल लाइफ सेविंग सर्जरी का निर्णय लिया गया। स्थिति इतनी नाजुक थी कि सर्जरी हार्ट-लंग मशीन के बिना, धड़कते दिल के साथ करनी पड़ी। यह प्रक्रिया बेहद जोखिमपूर्ण थी, लेकिन विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक इसे अंजाम दिया।
सर्जरी के बाद मरीज को छह दिनों तक गहन चिकित्सा निगरानी और समर्पित देखभाल में रखा गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद उसे 3 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. एम. क्यू. आजम ने कहा कि पेनिट्रेटिंग कार्डियक इंजरी के मामलों में समय पर उपचार, आपसी तालमेल और टीमवर्क जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह सफलता ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और नर्सिंग टीमों के बीच बेहतरीन समन्वय का परिणाम है।
सर्जरी टीम में डॉ. नीरज कुमार के साथ डॉ. एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रवीण तलवार, डॉ. संदीप और डॉ. मिन्हाज का विशेष सहयोग रहा।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं, ट्रॉमा सर्जरी विभाग के फैकल्टी डॉ. मधुर उनियाल ने कहा कि इस प्रकार की चोटों में मरीज के जीवित बचने की संभावना बेहद कम होती है। उन्होंने बताया कि पिछले सात वर्षों में ट्रॉमा सर्जरी विभाग ने अपनी क्षमताओं को काफी मजबूत किया है और अब वह दुर्लभ एवं जटिल मामलों के उपचार में पूरी तरह सक्षम है।

Parvatanchal