असर: कांवड़ के चलते 1500 ट्रकों का संचालन ठप, कारोबार को हो चुका है 30 करोड़ का नुकसान
हरिद्वार(आरएनएस)। कांवड़ मेले के चलते नेशनल हाईवे और अंदरूनी मार्गों पर भारी वाहनों का संचालन बंद होने से जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में माल ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। सिडकुल, रुड़की, भगवानपुर, लक्सर और बहादराबाद से रोजाना दूसरे राज्यों को जाने वाले 1500 से अधिक ट्रकों के पहिए थम गए हैं। ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि मार्ग बंद होने से अब तक करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में हाईवे पर भारी वाहनों का संचालन बंद रहता है। इस साल भी 30 जुलाई से भारी वाहनों का संचालन बंद कर दिया गया। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक 30 जुलाई से चार अगस्त तक रात 12 बजे से सुबह चार बजे तक भारी वाहनों के संचालन की बात हुई थी।लेकिन तीन अगस्त से पूरी तरह रोक लगा दी गई। कांवड़ मेले के दौरान हाईवे बंद होने से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को करीब 30 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। ऑल उत्तराखंड ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अकरम हुसैन ने बताया कि जिले के औद्योगिक क्षेत्रों से प्रतिदिन 1500 से अधिक ट्रक माल लेकर विभिन्न राज्यों के लिए रवाना होते हैं। एक ट्रक का औसत किराया करीब 30 हजार रुपये है। मार्ग बंद होने के कारण ट्रकों का संचालन प्रभावित हुआ है। इससे कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऑल ओवर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राव अखलाक खां ने बताया कि कांवड़ मेले के दौरान यूपी की तरफ जाने वाले भारी वाहनों को भी रूट डायवर्जन के कारण अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। कई ट्रकों को मुजफ्फरनगर होकर चक्कर काटना पड़ रहा है। जिससे समय और ईंधन का खर्च बढ़ गया है। सिडकुल और हरिद्वार शहर के बीच संपर्क प्रभावित होने से औद्योगिक इकाइयों की माल सप्लाई प्रभावित है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के महासचिव आदेश सैनी सम्राट ने बताया कि हर साल कांवड़ मेले में भारी वाहनों के लिए मार्ग खुला रखने की मांग की जाती है। लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। हेत्तमपुर बिहारीगढ़ मार्ग का लाभ नहीं मिलता है। कांवड़ मेले के दौरान भारी वाहनों के संचालन का विकल्प सीमित हो जाता है। इस वजह से बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है।

