तैयारी: अब दूसरे राज्यों के जंगलों में भी दहाड़ेंगे कार्बेट के बाघ-गुलदार
देहरादून (RNS)। कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर में बढ़ती बाघों और गुलदारों की संख्या को देखते हुए अब इन्हें दूसरे राज्यों में भेजने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। कार्बेट टाइगर रिजर्व ने सैद्धांतिक रूप से बाहरी राज्यों को बाघ और गुलदार देने की तैयारी जताई है। हालांकि इसके लिए निर्धारित नियमों के तहत सक्षम स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होग
ढेला रेस्क्यू सेंटर में बाघ और गुलदारों के लिए 20-20 बाड़े बनाए गए हैं। आबादी वाले क्षेत्रों से रेस्क्यू किए गए उम्रदराज, शिकार करने में अक्षम अथवा हिंसक बाघ और गुलदारों को यहां रखा जाता है। वर्तमान में सेंटर में 17 बाघ और 20 गुलदार हैं। इनकी देखभाल, भोजन और उपचार पर विभाग को हर साल लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। आने वाले समय में आबादी वाले क्षेत्रों से और वन्यजीवों के रेस्क्यू की संभावना को देखते हुए सेंटर में क्षमता का दबाव भी बढ़ सकता है।
इसी को देखते हुए कार्बेट अब दूसरे राज्यों को बाघ और गुलदार देने के विकल्प पर काम कर रहा है। यदि किसी राज्य की ओर से वन्यजीवों की मांग आती है तो संबंधित प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद नियमानुसार स्थानांतरण की कार्रवाई की जाएगी।
कार्बेट के बाघ इससे पहले भी उत्तराखंड के दूसरे टाइगर रिजर्व में भेजे जा चुके हैं। कार्बेट से पांच बाघ राजाजी टाइगर रिजर्व में भेजे गए हैं, जबकि पांच और बाघ-बाघिन को राजाजी भेजने का प्रस्ताव है। इसके अलावा रेस्क्यू सेंटर से एक बाघ को देहरादून के चिड़ियाघर में भी भेजा जा चुका है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला के अनुसार रेस्क्यू सेंटर में बाघ और गुलदारों की अच्छी संख्या है। अन्य राज्यों को वन्यजीव देने के लिए विभाग सैद्धांतिक रूप से तैयार है। यदि किसी राज्य को आवश्यकता होती है तो निर्धारित नियमों के तहत बाघ और गुलदार देने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

