राहत: तलाक के आदेश के बाद पति की मौत होने पर भी नहीं छिनेगा पत्नी का अधिकार: गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
अहमदाबाद (आरएनएस)। फैमिली कोर्ट से तलाक का आदेश मिलने के बाद यदि पति की मौत हो जाती है, तो भी पत्नी का कानूनी हक खत्म नहीं होगा. गुजरात हाई कोर्ट ने शादी, तलाक और विरासत के अधिकारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है.
हाई कोर्ट के मुताबिक, तलाक के मामलों में बात सिर्फ शादी टूटने तक सीमित नहीं होती. इसका सीधा असर महिला की सामाजिक पहचान, विधवा के रूप में उसके कानूनी दर्जे और पति की संपत्ति में मिलने वाले हिस्से (विरासत के अधिकार) पर पड़ता है. इसलिए पति की मृत्यु के बाद भी कानूनी अपील बंद नहीं होगी, और हाई कोर्ट को अगर सही लगता है तो वह फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को पलट (रद्द) भी सकता है.
यह पूरा मामला आनंद जिला फैमिली कोर्ट से जुड़ा है. यहां याचिकाकर्ता महिला और उसके पति के बीच लंबे समय से वैवाहिक विवाद चल रहा था. दोनों का विवाह वर्ष 1976 में हुआ था और उनके छह बच्चे हैं. पति ने डिवोर्स एक्ट, 1879 के तहत तलाक की याचिका दायर की थी. जिसमें पत्नी पर परित्याग (छोड़कर जाने) का आरोप लगाया गया था.
फैमिली कोर्ट की कार्यवाही में पत्नी के उपस्थित न होने के कारण अदालत ने एकतरफा फैसला लेते हुए वर्ष 2022 में पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी थी. इसके बाद पत्नी ने इस फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी. अपील लंबित रहने के दौरान ही वर्ष 2024 में पति की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके कानूनी वारिसों को इस मामले में पक्षकार बनाया गया.
याचिकाकर्ता के वकील आकाश मोढ ने हाई कोर्ट में दलील दी कि फैमिली कोर्ट ने बिना किसी पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत के यह मान लिया कि पत्नी ने पति को छोड़ा था. सिर्फ पति के एकतरफा बयानों के आधार पर ऐसा फैसला देना कानूनी रूप से सही नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि यदि तलाक की डिक्री लागू रहती है, तो पत्नी विधवा के रूप में अपनी कानूनी स्थिति खो देगी. इसका सीधा असर मृतक की संपत्ति में उसके विरासत के अधिकारों, अन्य कानूनी लाभों और सामाजिक पहचान पर पड़ेगा.
गुजरात हाई कोर्ट के जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने इस पर सहमति जताई. पीठ ने कहा कि सामान्य तौर पर यदि सुनवाई के दौरान किसी पक्ष की मृत्यु हो जाए तो मामला बंद हो सकता है, लेकिन तलाक का आदेश पारित होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल जाती है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश के बाद कानूनी स्थिति में आए बदलाव का सीधा असर संपत्ति के अधिकारों और सामाजिक प्रतिष्ठा पर पड़ता है. इसलिए, ऐसी परिस्थितियों में मृत्यु के बाद भी कानूनी कार्यवाही जारी रखी जा सकती है और पीड़ित पक्ष को फैमिली कोर्ट के निष्कर्षों को चुनौती देने का पूरा अधिकार है.
मामले के तथ्यों और कानूनी स्थिति को देखते हुए हाई कोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट का निष्कर्ष बिना किसी ठोस आधार के था. इसके बाद अदालत ने फैमिली कोर्ट के 2022 के तलाक के आदेश को रद्द कर दिया. इस फैसले से याचिकाकर्ता महिला के विधवा होने के कानूनी दर्जे और संपत्ति के अधिकारों की रक्षा का रास्ता साफ हो गया है.
याचिकाकर्ता के वकील आकाश मोढ ने कहा कि यह फैसला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के उन सभी मामलों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा जहां तलाक के बाद किसी पक्ष की मौत हो जाती है.

