आफ़त: सतपुली-गुमखाल के बीच हाईवे चौड़ीकरण बरसात में बनेगा मुसीबत का सबब
पौड़ी। कोटद्वार-पौड़ी हाईवे पर गुमखाल-सतपुली के बीच चौड़ीकरण जारी है। इस समय मार्ग पर कई जगह डेंजर जोन हैं। मार्ग पर मलबा आने और बोल्डर गिरने की आशंका से खतरा मंडराने लगा है। वहीं, हाईवे के विकल्प के तौर रैतपुर-मैंदोली-जयहरीखाल मार्ग का डामरीकरण नहीं होने से बरसात में आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी होने की आशंका है। गुमखाल-सतपुली के बीच जिन जगहों पर डेंजर बने हैं। बरसात में उन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ तो जिले की 80 फीसदी आबादी समेत पूरे जिले में इसका असर पड़ेगा। दरअसल यही हाईवे पौड़ी होते हुए श्रीनगर में ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर मिलता है। वहीं, गुमखाल-सतपुली हाईवे के वैकल्पिक मार्ग के तौर में लाए जा रहे सतपुली-कांडाखाल-सिसल्डी मार्ग से कोटद्वार की दूरी लगभग दोगुनी हो जाती है। ऐसे में हाईवे का सतपुली-मैंदोली-जयहरीखाल मार्ग एक बेहतर विकल्प हो सकता है। मार्ग से जयहरीखाल की दूरी सतपुली से 10 किमी कम है। वहीं, गुमखाल की दूरी हाईवे 534 के बराबर 20 किमी पड़ती है। हालांकि मार्ग बदहाल है। मैंदोली गांव से रैतपुर तक के आठ किमी के पैच पर ऊंचाई, तंग मोड़ और संकरी सड़क के चलते कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि रैतपुर-मैंदोली-जयहरीखाल मार्ग का डामरीकरण व सुधारीकरण हो तो जनपद की अधिकांश आबादी को गुमखाल-सतपुली मोटर मार्ग अवरुद्ध रहने पर इस मार्ग का लाभ मिलेगा।
वहीं, पौड़ी सतपुली की ओर से सीधे जयहरीखाल, लैंसडौन आवागमन करने वालों को 10 किमी कम दूरी तय करनी पड़ेगी। पूर्व ग्राम प्रधान गढ़कोट नरेंद्र रावत, पूर्व प्रधान मदन पंवार, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य किरन रौतेला, मनीष रौतेला, जगदीश रौतेला, महावीर सिंह रावत आदि ग्रामीणों ने लोनिवि मंत्री सतपाल महाराज से सड़क के डामरीकरण व सुधारीकरण की मांग की है। (प्रतीकात्मक फोटो)
