सुनवाई: जिपं अध्यक्ष चुनाव केस में रिपोर्ट पेश करने के लिए सरकार ने हाईकोर्ट से मांगा समय
अगली सुनवाई के लिए 17 दिसंबर की तिथि की गई नियत
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 14 अगस्त 2025 को नैनीताल जिला पंचायत के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव में हुए बवाल, 5 जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण, चुनाव में डाले गए एक मतपत्र में ओवरराइटिंग की शिकायत, जिला पंचायत चुनाव में री-पोलिंग और निष्पक्ष चुनाव कराने को लेकर स्वतः संज्ञान लिए जाने वाली दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की।
मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 17 दिसंबर की तिथि नियत की है। आज हुई सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि मामले में जांच चल रही है और रिपोर्ट पेश करनी है। इसलिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाए। यही नहीं महाधिवक्ता ने यह भी कहा गया कि यह अपराध से जुड़ा मामला है। इसलिए इसमें जनहित याचिका नहीं हो सकती। इसमे सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय हैं, जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए 17 दिसंबर की तिथि नियत की है।
आज मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में हुई। मामले के अनुसार 14 अगस्त को कोर्ट ने नैनीताल के जिला पंचायत के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान उनके सदस्यों का कथिथ अपहरण करने के मामले में कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। जिसमें कई जीते हुए सदस्यों ने न्यायलय की शरण भी ली थी।
बीडीसी सदस्य पूनम बिष्ट ने हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका दायर कर कहा था कि नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में एक मतपत्र में ओवरराइटिंग कर क्रमांक 1 को 2 कर अमान्य घोषित कर दिया गया। याचिका में कोर्ट से जिलाध्यक्ष पद के लिए पुनः मतदान कराए जाने की प्रार्थना की थी। नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर चुनाव के दौरान कुछ लोगों पर 5 जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण करने का आरोप लगा था। इस चुनाव में भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष उम्मीदवार की जीत घोषित की गई थी। पूरे मामले में कांग्रेस ने भाजपा पर उनके समर्थक जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण के आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में सामने आए 5 सदस्यों ने बिना किसी दबाव के घूमने जाने की बात कही थी। ये मामला प्रदेश में काफी दिनों तक चर्चा का विषय बना रहा। कांग्रेस ने अपहरण मामले पर नैनीताल एसएसपी पर कार्रवाई की मांग की। ये मामला कांग्रेस ने गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान भी उठाया, जिस कारण विधानसभा का सत्र कुछ घंटों ही आहूत हो सका था।

