आफ़त: केदारघाटी में नही थम रहा भालू का आतंक,मैंखडा में गाय का किया बनाया शिकार, बछिया को घायल
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी में भालू का आंतक थमने का नाम नही ले रहा है। मैंखडा में भालू के हमले में गाय की मौत ओर बछिया घायल हो गई है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से शीघ्र भालू को पकडने की मांग की है।
बता दें कि शुक्रवार रात्रि को मैंखडा में भालू ने अनीता देवी पत्नी स्व दिनेश लाल की गौशाला का दरवाजा तोड़ कर गाय को मार दिया वही बछिया घायल हो गई। प्रातः जब अनीता देवी गौशाला पहुंची तो इस प्रकार की घटना देख हतप्रद रह गई। वहीं ग्रामवासियों ने तत्काल घटना की सूचना वन विभाग को दी। ग्राम प्रधान मैखंडा कविता देवी ने बताया कि वन विभाग की ओर से बीते दिनों भालू का रेस्क्यू कर छोड़ दिया गया था। उस दौरान भी ग्रामवासियों ने भालू को पकड़ने की मांग की गई थी। लेकिन वन विभाग ने भालू को जंगल में छोड़ दिया जिसका नतीजा ग्राम वासियों को अपने मवेशियों को खोकर चूकना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए शीघ्र भालू को पकड़ने की कवायद की जाय। वन क्षेत्राधिकारी शंकर सिंह रावत ने बताया कि वन कर्मियों ने घटना स्थल का मुआयना किया है साथ ही तत्काल गौशाला मरम्मत के लिए दस हजार रुपए की मुआवजा राशि दी जाएगी। मृत मवेशियों का शीघ्र मुआवजा शासनादेश अनुसार दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से वन कर्मी लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं। इसके साथ ही जल्द भालू को पकड़ने के लिए क्षेत्र में पिंजरा लगा दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने ग्रामवासियों से अपनी गौशालाओं के दरवाजे मजबूत बनाने एवं देर रात्रि आवागमन न करने की अपील की। इस दौरान वन दरोगा अभिषेक नेगी, बीट अधिकारी जितेंद्र रावत सहित वन कर्मी व ग्रामीण उपस्थित रहे।
स्कूल से घर लौट रहे बच्चों को रास्ते में दिखा भालू
उधर, विकासखंड अस्त्यमुनि के तलगढ गांव में भी भालू की दशहत से स्कूली बच्चों की पढाई प्रभावित हो रही है। स्कूल से घर लोट रहे बच्चों को रास्ते में भालू दिखाई दिया। जिससे बच्चो में अफरा-तफरी मंच गई। ग्रामीणों ने हल्ला कर भालू को वहा से भगाया।
ग्रामीण लखपत सिंह नेगी ने बताया कि गांव के आस-पास के क्षेत्रों में आए दिन भालू की धमक देखने को मिल रही है। स्कूल गांव से करीब दो किमी दूर है और मार्ग में जंगल होने से अक्सर भालू दिखाई देता है। जिससे कई बार बच्चों को रास्ते से ही वापस लोटना पडता है। उन्होने बताया कि शुक्रवार को देर शाम स्कूल से घर लोट रहे बच्चों को रास्ते में भालू दिखाई दिया। ग्रामीणों ने हो-हल्ला कर बडी मुश्किल से भालू को वहां से खदेडा। अब तो बच्चों को अकेले स्कूल भेजने में भी डर लग रहा है। उन्होने वन विभाग से भालू की दहशत से निजात दिलाने की मांग की।

