हताशा: पहलगाम ‘आतंकी फंडिंग’ की फर्जी धमकी से घबराए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कर ली आत्महत्या

हताशा: पहलगाम ‘आतंकी फंडिंग’ की फर्जी धमकी से घबराए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कर ली आत्महत्या
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सुसाइड नोट में लिखा- बर्दाश्त नहीं कर सका देशद्रोही कहलाने की बदनामी

भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगों की बेरहम ब्लैकमेलिंग ने एक सम्मानित वरिष्ठ अधिवक्ता की जान ले ली। 62 वर्षीय शिवकुमार वर्मा ने सोमवार देर रात अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने साफ लिखा है कि किसी ने उनके नाम से फर्जी बैंक अकाउंट खोलकर पहलगाम आतंकी हमले के आतंकियों को फंडिंग करने का झूठा आरोप लगाया, जिसके बाद ‘देशद्रोहीÓ कहलाने के डर ने उन्हें तोड़ दिया।
शिवकुमार वर्मा जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के बरखेड़ी इलाके में रहते थे। उनकी पत्नी और बेटी इन दिनों दिल्ली में इलाज करा रही थीं, बेटा पुणे में नौकरी करता है। घर पर वो अकेले थे। सोमवार रात पत्नी का फोन आया, लेकिन जवाब नहीं मिला। चिंतित परिजनों ने किरायेदार को घर देखने भेजा। किरायेदार ने दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं आया। झांककर देखा तो कमरे में शिवकुमार वर्मा का शव फांसी पर लटका हुआ था। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर शव नीचे उतारा।
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें वर्मा ने लिखा:”मैं अपनी मर्जी से अपनी जान दे रहा हूं। किसी ने मेरे नाम से फर्जी बैंक अकाउंट खोल दिया और पहलगाम हमले के आतंकियों को फंडिंग करने का आरोप लगा दिया। देशद्रोही कहलाने की बदनामी मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैंने अपने बच्चों की खुशहाली की दुआ मांगी है और भगवान भोलेनाथ से उनके भविष्य की रक्षा की प्रार्थना की है। नोट में उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी के दौरान अपनी सेवाओं का भी जिक्र किया। लिखा कि उस दौरान उन्होंने सैकड़ों मृतकों का अंतिम संस्कार कराया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उनकी सेवा से प्रभावित होकर एंबुलेंस भी मुहैया कराई थी। वे अब तक करीब 50 बार रक्तदान कर चुके थे।

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