स्वस्थ जीवन: समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग कैसे करें
डॉ. नन्दकिशोर साह
हमारे शरीर में एक घड़ी होती है, जिससे बायोलॉजिकल क्लॉक कहा जाता है। यदि आप निश्चित समय पर निश्चित काम करने की आदत डाल लेते हैं, तो उस समय आपका शरीर और मन दोनों ही उस काम को करने के लिए पूरी तरह तैयार होते हैं। सूरज उगने से दो घंटे पहले उठें और सूरज डूबने के दो घंटे बाद सो जाएँ। जल्दी सोने से जब आप सुबह चार बजे उठते हैं, तो आपके पास समय ही समय रहेगा। यदि आपका पड़ोसी जल्दी उठना है तो आप उससे भी ज्यादा जल्दी उठे। क्योकि सुबह के एक घंटे में आप जितना काम कर लेते हैं, उतना दोपहर में तीन घंटों में हो पाता है। समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग में सबसे बड़ी दिक्क़़त दूसरों की तरफ़ से आती है और सुबह में यह दिक्क़़त सबसे कम होती है। सुबह मोबाइल का टेंशन भी नहीं रहता है। अख़बार भी देर से आता है। बच्चे भी प्राय: देर से उठते हैं। इसलिए आप पूरी एकाग्रता से काम कर सकते हैं। सुबह 10 बजे तक खुश रहेंगे, तो बाकी का दिन आपकी परवाह स्वयं कर लेगा।
समय बचाने के लिए आपको काम का सही समय चुनना होगा। जैसे ही आप कोई महत्वपूर्ण काम शुरू करते हैं, वैसे ही बाधाओं की गुरुत्वाकर्षण शक्ति सक्रिय हो जाती है और आपको नीचे धकेलने लगती है। दूसरे लोग आकर आपके काम में विघ्न डालते हैं। हर अच्छे काम में बाधाएं हमेशा आती है। मेरी सलाह यह है कि अपने जीवन को 10 मिनट की इकाइयों में बांट दें ताकि निरर्थक गतिविधियों में न्यूनतम समय बर्बाद हो। आप अपने मिनट का ध्यान रखेंगे, तो घंटे अपनी परवाह खुद कर लेंगे। आप 10 मिनट में बहुत कुछ कर सकते हैं। यह 10 मिनट अगर चले गए तो हमेशा के लिए चले जाएंगे।
हमारे पूर्वजों की जीवनशैली ज्यादा स्वस्थ थी, क्योंकि वे प्रकृति के कऱीब थे। प्रकृति की लय में कार्य करते थे। सुबह का वातावरण इतना पवित्र और शांत रहता था कि ऋषि-मुनि ब्रह्म मुहूर्त में भजन-पूजन करते थे। वे मुर्गे की बाँग के साथ उठते थे और चाँद निकलने पर सो जाते थे। इस तरह वे अपने शरीर को प्रकृति के सामंजस्य में रख रहे थे। आज आधुनिकता की होड़ में कृत्रिमता का माहौल इतना बढ़ चुका है कि प्रकृति से मनुष्य का सारा संपर्क ही टूट चुका है। रात को देर तक जागने से मनुष्य की प्राकृतिक लय ख़त्म हो जाती है और वह सुबह देर से उठता है। नतीजा यह होता है कि उसका हाज़मा खराब होता है, क़ब्ज़ की शिकायत रहती है, ताजग़ी और स्फूर्ति का अभाव होता है और दिन भर उसके शरीर में आलस भरा रहता है। व्यक्ति का मिजाज चिड़चिड़ा हो जाता है। छोटी-छोटी बात पर क्रोध व गुस्सा करता है।
जो लोग सोचते हैं कि उनके पास शरीर के व्यायाम के लिए समय नहीं है। उन्हें देर-सबेर बीमारी के लिए समय निकालना पड़ता है। व्यायाम तो एक निवेश है, जिसका आपको समय प्रबंधन के संदर्भ में कई गुना फल मिलेगा। एक तो इससे आपका स्वास्थ्य अच्छा रहता है, जिससे बीमारी के कारण आपका कीमती समय नष्ट नहीं होता। दूसरे, इससे आपके शरीर के साथ-साथ दिमाग में भी स्फूर्ति और चुस्ती आ जाती है। तीसरे आपका आलस दूर हो जाता है।

यदि आप पैदल चलकर व्यायाम कर रहे हैं, तो इसके लिए आपको दूरी और समय का सही सामंजस्य करना होगा। पचास मिनट में पाँच किलोमीटर घूमना आदर्श होता है। तीस मिनट में तीन किलोमीटर पैदल चलें और तीस मिनट में बाक़ी व्यायाम करें। पैदल चलने के लिए सही समय सूर्योदय के पहले रहता है, क्योंकि उस समय वातावरण में प्रदूषण नहीं होता है और ताज़ा ऑक्सीजन आपके फेफड़ों व दिमाग में पहुँचकर आपको ताज़गी से भर देती है। रात को वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए आपका दिमाग़ कम चल पाता है। दिमागी काम के लिए रात का समय आदर्श नहीं होता है। आदर्श समय तो सुबह का ही रहता है, जब वातावरण में ऑक्सीजन से भरपूर रहता है। यकीन न हो, तो सुबह छह बजे और शाम को छह बजे उसी सड़क पर घूमकर देख लें।
हम सुबह सबसे अच्छी तरह काम क्यों कर सकते हैं? एक कारण तो यह है कि उसे समय आराम कर लेने के बाद शरीर थका हुआ नहीं रहता है। दूसरा कारण यह है कि सुबह ऑक्सीजन ज्यादा रहती है। तीसरा कारण यह है कि उस वक्त हमारा पेट खाली होता है। पेट खाली रहने से दिमाग ज्यादा तेज चलता है। इसलिए हमें एक बार में ज्यादा भोजन करने से बचना चाहिए, ताकि हम पर आलस सवार नहीं हो सके। आलस वह मृत सागर है, जो सभी सद्गुणों को लील लेता है। जरूरत से ज्यादा भोजन करना, ज्यादा तला-भुना भोजन करने से आपकी ऊर्जा में कमी आ जाती है और आपकी एकाग्रता में बाधा आती है। आलस आप पर सवार हो जाता है। आलस मीठा होता है, लेकिन इसके परिणाम बेहद बेरहम होता हैं।
जो जल्दी सोता है, जल्दी उठता है। उसके पास स्वास्थ्य, पैसा और बुद्धि रहती है। सुबह देर से उठने पर आपके पास दूसरे कामों के लिए तो समय रहता है, लेकिन अपने लिए समय नहीं रहता। सुबह का पहला घंटा पूरे दिन की दिशा तय करता है। यह समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए सुंबह जल्दी विस्तर छोड़कर लक्ष्य की अग्रसर होना चाहिए।

