स्मरण: शहीदे आजम भगतसिंह के अनन्य मित्र एवं महान क्रांतिकारी कामरेड शिव वर्मा को सैल्यूट!
अनंत आकाश
शिव वर्मा जी का जन्म- 9 फरवरी, 1907, जिला कानपुर उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका देहवसान 10 जनवरी, 1997 को कानपुर में हुआ ।
वे अपने समय में विख्यात क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। वे मार्क्सवाद से प्रभावित होकर कम्युनिस्ट बन गए तथा उत्तर प्रदेश में कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव भी रहे, 1964 में सीपीआई एम के गठन के बाद वे उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल का सदस्य बने । राष्ट्रीय मुक्ति आन्दोलन में राष्ट्रीयता की भावना के कारण गांधीजी के असहयोग आंदोलन में सम्मिलित होने के लिए उन्होंने विद्यालय की पढ़ाई छोड़ दी थी। जब गांधी जी ने 1922 में आंदोलन वापस ले लिया तो शिव वर्मा पुनः अपने अध्ययन हेतु कानपुर आ गए। तत्पश्चात यहाँ उनका संपर्क क्रांतिकारियों से हुआ और शीघ्र ही सरदार भगत सिंह व चंद्रशेखर आजाद आदि क्रांतिकारियों से उनकी निकटता हो गई। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी नामक क्रांतिकारी संगठन के केंद्रीय समिति के सदस्य तथा उत्तर प्रदेश में उसके मुख्य संगठनकर्ता थे।
1983 में स्टूडैन्ट्स फैडरेशन आफ इण्डिया (एस एफ आई) के उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन में शामिल होने वे देहरादून आये थे जिसमें उन्होंने आजादी के मुक्ति आन्दोलन में देहरादून आने का स्मरण भी सुनाया।
शिव वर्मा को कई क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने के आरोप में 1929 में गिरफ्तार कर किया गया और ‘द्वितीय लाहौर षड्यंत्र केस’ में आजीवन कारावास की सजा देकर अंडमान जेल भेज दिया गया। शिव वर्मा ने लाहौर षड्यंत्र केस में कालापानी सहित 17 साल जेल में गुजारे। अंडमान में उनकी एक आंख खराब हो गयी। जब देश आज़ाद हुआ तब जाकर वे जेल से छूटे। उनकी पुस्तक ‘संस्मृतियां’ को क्रांतिकारियों की एकमात्र प्रामाणिक पुस्तक कहा जाता है। इसमें महावीर सिंह सहित कई क्रांतिकारियों की सत्य गाथा है कि किस तरह अंडमान के अत्याचार में वे मिट गए, लेकिन उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से माफी नहीं मांगी।
कामरेड शिव वर्मा को उनके स्मृति दिवस पर क्रान्तिकारी सैल्यूट !!

