स्मरण: महान पत्रकार, ‘प्रताप’ के संपादक व क्रान्तिकारी गणेशशंकर विद्यार्थी की जयंती पर सादर नमन
अनंत आकाश
गणेशशंकर विद्यार्थी , भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस और उन सभी क्रान्तिकारियों जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए बलिदान दिया, को याद करते हुए एक सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि क्या हम इन महान शहीद क्रांतिकारियों के विचारों और सपनों का भारत बना पाए? क्या लोकतंत्र की रक्षा कर पा रहे हैं? क्या संवैधानिक सीमाओं और मर्यादाओं को बचा पाएंगे? क्या वास्तव में जनता के द्वारा, जनता का शासन , जनता के लिए” वाली लोकतंत्र की परिभाषा सार्थक हो पा रही है ? इन प्रश्नों के उत्तर हम सभी को ढूंढने होंगे !
आज लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है, तभी शहीदों के सपनों का भारत का निर्माण हो पायेगा। अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को उनकी जयन्ती पर सादर नमन !
विद्यार्थी जी का संक्षिप्त परिचय :
उनका जन्म 26 अक्टूबर 1890 को नौनिहाल,अतरसुइया,इलाहबाद में हुआ । उनके पिता– मुंशी जयनारायण, हरगांव,फतेहपुर में
हेड मास्टर थे जो मुंगावली,ग्वालियर स्टेट से सम्बन्ध रखते थे ।
उनका निधन 25 मार्च 1931 को कानपुर दंगा रुकवाने के प्रयास के दौरान हुआ। वे समाचार पत्र ‘प्रताप’ के संपादक थे जो कि आजादी के आन्दोलन की हर सम्भव मदद कर रहा था ।
अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को सादर नमन !*

