सबक: दुराचार के आरोपी को 20 साल का कठोर कारावास, दिव्यांग नाबालिग को बनाया था हवस का शिकार
रुद्रपुर। हवस की भूख जब इंसान को हैवान बना देती है तो वह नैतिकता की तमाम हदों को पार करने से भी नहीं हिचकता। इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले एक ऐसे ही दरिंदे ने घर में घुसकर एक दिव्यांग नाबालिग लड़की की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसकी अस्मत लूट ली थी, जिसे अपने कुकर्म का फल भुगतने के लिए सलाखों के पीछे जिंदगी बितानी होगी। दिव्यांग के साथ दुराचार करने वाले इस युवक को पॉक्सो न्यायाधीश अश्वनी गौड़ ने 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हज़ार रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई है।
मामले की जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजक विकास गुप्ता ने बताया कि 29 नवंबर 2020 को खटीमा थाने में एक महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि जब वह एक वैवाहिक समारोह में काम करने गई थी तो घर पर उसकी 14 वर्षीय दिव्यांग लड़की अकेली थी। रात्रि में वार्ड 5 इस्लामनगर, थाना खटीमा निवासी अब्दुल पुत्र छोटे ने घर में घुस कर उसकी 14 वर्षीय दिव्यांग बेटी के साथ जबरन दुराचार कर डाला। उसने किसी को बताने पर बालिका को जान से मार देने की धमकी दी। तहरीर के मुताबिक, देर रात जब महिला घर लौटी तो अपनी बेटी को चारपाई पर निर्वस्त्र व बदहवास पड़ा देखा। कारण पूछने पर वह रोने लगी और सारी बात बताई। उस समय महिला के साथ पड़ोसन भी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद तीन दिसंबर 2020 को आरोपी अब्दुल को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया। उसके विरुद्ध पॉक्सो न्यायालय में मुक़दमा चला, जिसमें विशेष लोक अभियोजक विकास गुप्ता ने नौ गवाह पेश कर आरोप सिद्ध कर दिया। इस पर पॉक्सो न्यायाधीश अश्वनी गौड़ ने दुराचार के आरोपी अब्दुल को विभिन्न धाराओं के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हज़ार रुपये जुर्माने की सज़ा सुना दी। आदेश के अनुसार, जुर्माने की धनराशि में से 30 हज़ार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में मिलेंगे। साथ ही न्यायाधीश ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में चार लाख रुपये देने के निर्देश राज्य सरकार को दिए।

