सख़्त रुख: सरकार की बड़ी कार्रवाई,विवादों में घिरे अल्पसंख्यक आयोग के सचिव भगवती प्रसाद त्रिवेदी को हटाया
बरकत अली को मिली सचिव की जिम्मेदारी, अप्रैल के बाद से आयोग में नहीं हुई सुनवाई; 150 से अधिक शिकायतें लंबित
देहरादून। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग में लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच शासन ने आयोग के सचिव भगवती प्रसाद त्रिवेदी को पद से हटा दिया है। उनकी जगह उप निदेशक बरकत अली को आयोग के सचिव का चार्ज सौंपा गया है। बरकत अली ने शनिवार को आयोग में कार्यभार ग्रहण कर लिया। सचिव के बदलाव के साथ अब आयोग में महीनों से ठप पड़ी शिकायतों की सुनवाई शुरू होने की उम्मीद जगी है।
भगवती प्रसाद त्रिवेदी की नियुक्ति को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे थे। आयोग में जेएस रावत की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद विभाग में एडीओ पद पर तैनात बीपी त्रिवेदी को सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। नियुक्ति की प्रक्रिया और नियमों को लेकर मोबीन अहमद ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की थी। इस मामले में 12 अक्टूबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
इसी बीच शासन स्तर पर सचिव को हटाने का निर्णय लिया गया। विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते की ओर से इस संबंध में कार्रवाई की गई है। त्रिवेदी को लेकर आयोग के भीतर भी लगातार असंतोष और विवाद की स्थिति बनी हुई थी।
आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम समेत कई सदस्यों की बैठक में सचिव के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठे थे। सचिव के कुछ अधिकार वापस लिए जाने और मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी को निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी।
वहीं विभागीय कर्मचारी रहे मृतक मोहसिन के परिजनों की ओर से भी त्रिवेदी के खिलाफ कई आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों और आयोग के भीतर बढ़ते विवाद के बीच सचिव को हटाने का फैसला सामने आया है।
हालांकि, लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।
सचिव विवाद का सीधा असर आयोग के कामकाज पर भी पड़ा। आयोग में अप्रैल के बाद से शिकायतों की सुनवाई नहीं हो सकी है। वर्तमान में 150 से अधिक शिकायतें लंबित बताई जा रही हैं।
शिकायतों की सुनवाई नहीं होने से फरियादियों को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है। अब नए सचिव बरकत अली के कार्यभार संभालने के बाद उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने जल्द से जल्द सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित शिकायतों का निस्तारण और नियमित सुनवाई व्यवस्था को पटरी पर लाना होगी।
मकतबों पर कार्रवाई को लेकर भी जल्द आदेश
इसी बीच मदरसों के साथ मकतबों यानी ट्यूशन प्वाइंट पर हुई कार्रवाई का मामला भी आयोग के सामने है। मकतबों को कार्रवाई से बाहर रखने की मांग को लेकर जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने शासन से मुलाकात की है।
विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि मकतब संबंधित एक्ट के दायरे से बाहर हैं। शासन की ओर से न्यायालय के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद एक-दो दिन में इस संबंध में आदेश जारी किए जाने की संभावना है।
अब सवाल—लंबित शिकायतों पर कब होगी सुनवाई?
सचिव बदलने के बाद आयोग के सामने अब सबसे अहम सवाल यही है कि पांच महीने से बंद सुनवाई कब शुरू होगी और 150 से अधिक लंबित शिकायतों का निस्तारण किस समयसीमा में किया जाएगा।
नए सचिव की नियुक्ति से आयोग के प्रशासनिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन असली परीक्षा लंबित शिकायतों की सुनवाई नियमित कराने और आयोग की कार्यप्रणाली को विवादों से बाहर निकालने की होगी।

