पहल : देहरादून की सड़कों पर चलेगा ‘गड्ढामुक्ति’ का महाअभियान
देहरादून। मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों और शहर की चरमराई प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जिला प्रशासन ने अब व्यापक अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सड़क और स्ट्रीट लाइट से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां और समयसीमा तय कर दी है। मानसून अवधि समाप्त होते ही 15 सितंबर से जिलेभर में ‘गड्ढामुक्ति’ अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा। प्रशासन ने 30 अक्टूबर 2026 तक सभी सड़कों को गड्ढामुक्त और आवागमन के लिए सुगम बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद निर्माणदायी एजेंसियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। क्षतिग्रस्त सड़कों और गड्ढों को चिह्नित करने के बाद संबंधित कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन की कोशिश है कि मानसून समाप्त होते ही बिना किसी अनावश्यक देरी के सड़क मरम्मत का काम धरातल पर शुरू कर दिया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश के कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। जगह-जगह बने गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और यातायात व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन ने सड़क मरम्मत को प्राथमिकता में रखा है। निर्माणदायी संस्थाओं को अपने-अपने क्षेत्र की सड़कों पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का लक्ष्य केवल गड्ढे भरना नहीं, बल्कि सड़कों को आवागमन के लिहाज से सुरक्षित और सुगम बनाना है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में काम पूरा कराने के साथ इसकी गुणवत्ता पर भी नजर रखी जाएगी। सड़क व्यवस्था के साथ ही शहर की प्रकाश व्यवस्था को सुधारने के लिए नगर निगम देहरादून ने भी विशेष अभियान शुरू कर दिया है। नगर निगम क्षेत्र में कुल 1,14,171 स्ट्रीट लाइटें हैं। इनमें से फिलहाल 169 स्ट्रीट लाइटों के खराब होने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के तत्काल निस्तारण के लिए नगर निगम ने विभिन्न क्षेत्रों में 40 विशेष टीमें तैनात की हैं।
नगर निगम की टीमें शिकायत वाले स्थानों पर पहुंचकर मौके पर खराब लाइटों की जांच कर रही हैं। जहां मरम्मत संभव है, वहां तत्काल मरम्मत की जा रही है, जबकि जरूरत पड़ने पर खराब लाइटों को बदला भी जा रहा है। मंगलवार को टीमों ने मसूरी डायवर्जन, बड़ोवाला, सर्वे ऑफ इंडिया कैंपस, कमला पैलेस से शिमला बाईपास, हरिद्वार बाईपास, सहस्रधारा क्रॉसिंग से आईटी पार्क रोड, आईएसबीटी-निरंजनपुर, दर्शनलाल चौक, सुभाष रोड-रेसकोर्स और फव्वारा चौक-नेहरू कॉलोनी समेत कई इलाकों में खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त किया।
व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को 20-20 जिला स्तरीय अधिकारियों की अलग-अलग टास्क फोर्स गठित की है। इन टास्क फोर्स को स्ट्रीट लाइट, गार्बेज प्वाइंट, मोटर मार्ग, फूड सेफ्टी और विद्युत चोरी की रोकथाम जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। खास बात यह है कि अधिकारी केवल दिन में ही नहीं, बल्कि रात में भी फील्ड विजिट कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। रात्रि निरीक्षण के दौरान यदि किसी क्षेत्र में खराब स्ट्रीट लाइट, सड़क की खराब स्थिति या अन्य अव्यवस्था सामने आती है तो अधिकारी मौके की फोटो और गूगल लोकेशन तत्काल संबंधित विभाग को भेज रहे हैं। इससे समस्या के चिह्नीकरण से लेकर उसके समाधान तक की प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास किया जा रहा है।
टास्क फोर्स द्वारा किए जा रहे निरीक्षण की दैनिक रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जा रही है। रिपोर्ट में सामने आने वाली समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभागों से दूर कराया जा रहा है। इस व्यवस्था से प्रशासन को यह भी पता चल रहा है कि किस क्षेत्र में किस तरह की समस्या है और उसके समाधान के लिए संबंधित विभाग ने क्या कार्रवाई की। प्रशासन की रणनीति अब दो स्तरों पर काम करने की है। दिन में सड़कों की मरम्मत और रात में व्यवस्थाओं का निरीक्षण। अधिकारियों का मानना है कि इस दोहरी निगरानी व्यवस्था से देहरादून की सड़क, यातायात और प्रकाश व्यवस्था में तेजी से सुधार लाया जा सकेगा। आने वाले डेढ़ महीने में सड़क मरम्मत का अभियान प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा भी होगा। खासकर 30 अक्टूबर की समयसीमा तक जिले की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निर्माणदायी एजेंसियों और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रशासन की सीधी नजर रहेगी।

