चिंताजनक: स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा: एक दिन में 24 नए मामले, दून अस्पताल में शुरू हुई विशेष फ्लू ओपीडी
देहरादून। राजधानी देहरादून में स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सोमवार को जिले में एक ही दिन में 24 नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इनमें 16 मरीज देहरादून जिले के हैं, जबकि आठ मरीज दूसरे जिलों से उपचार के लिए दून के अस्पतालों में भर्ती हैं। इसके साथ ही जिले में स्वाइन फ्लू के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 105 हो गई है। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 36 मरीज उपचाराधीन हैं। इनमें अकेले श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 22 और एम्स ऋषिकेश में सात मरीज भर्ती हैं।
इधर, स्वाइन फ्लू से हुई मौतों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की डेथ ऑडिट कमेटी ने महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। जिले में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव छह मरीजों की मौत के बाद सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा के स्तर पर गठित विशेषज्ञ समिति ने सभी मामलों का डेथ ऑडिट किया। समिति ने दो मरीजों की मौत का आधिकारिक कारण स्वाइन फ्लू माना है।
सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, स्वाइन फ्लू से हुई पुष्टि वाली मौतों में पौड़ी निवासी 59 वर्षीय व्यक्ति और देहरादून निवासी 52 वर्षीय महिला शामिल हैं। दोनों मरीज पहले से ही गंभीर बीमारियों यानी को-मॉर्बिडिटी से पीड़ित थे। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव छह मरीजों की मौत दर्ज हुई थी, लेकिन डेथ ऑडिट में सामने आया कि अन्य चार मरीजों की मृत्यु का प्राथमिक कारण स्वाइन फ्लू नहीं, बल्कि उनकी अन्य गंभीर बीमारियां थीं। स्वाइन फ्लू के साथ ही जिले में डेंगू का खतरा भी बना हुआ है। सोमवार को डेंगू की एलिसा जांच में दो नए मरीज पॉजिटिव मिले। इसके बाद जिले में डेंगू संक्रमितों की कुल संख्या 114 पहुंच गई है। इनमें 55 मरीज देहरादून जिले के और 59 अन्य जिलों के हैं। वर्तमान में नौ एक्टिव मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग और आशा कार्यकत्रियों की टीमें डेंगू की रोकथाम के लिए लगातार घर-घर जाकर लार्वा सर्वे कर रही हैं। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में फॉगिंग अभियान भी चलाया जा रहा है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कुमार जी कौल ने बताया कि स्वाइन फ्लू का कोई नया वेरियंट सामने नहीं आया है। अधिकांश मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण ही देखने को मिल रहे हैं, लेकिन बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अरुण पांडेय के मुताबिक स्वाइन फ्लू में सामान्य तौर पर नजला, खांसी और जुकाम जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि किडनी, लिवर, हृदय और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए संक्रमण अधिक जोखिम वाला हो सकता है। कीमोथैरेपी और डायलिसिस करा रहे मरीजों को भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और निमोनिया में बदलने की आशंका रहती है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना, मास्क का इस्तेमाल करना और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच दून अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुविधा और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए अस्पताल परिसर के बाहर अलग कंटेनर में विशेष ‘फ्लू ओपीडी’ शुरू कर दी है। प्राचार्य डॉ. गीता जैन और एमएस डॉ. आरएस बिष्ट के निर्देश पर पंजीकरण प्रभारी विनोद नैनवाल ने इसकी व्यवस्था की है।
विनोद नैनवाल को परामर्श, जांच और रिपोर्टिंग के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। फ्लू ओपीडी में कम्युनिटी मेडिसिन की पीजी डॉक्टर डॉ. ध्रुवी राव और इंटर्न डॉ. अंकिता मेहरा मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दे रही हैं। अलग फ्लू ओपीडी शुरू होने से संदिग्ध मरीजों की जांच और उपचार की प्रक्रिया को मुख्य ओपीडी से अलग रखने में मदद मिलेगी, जिससे अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ के बीच संक्रमण फैलने का जोखिम भी कम किया जा सकेगा।

