ख़ास ख़बर: तूल पकड़ने लगा है आयुष रावत की गिरफ्तारी का मामला, 23 को कोतवाली घेरेगा बेरोजगार संघ
काशीपुर। कथित रूप से सरकार की छवि धूमिल करने के मामले में एक युवक की गिरफ्तारी का प्रकरण के तूल पकड़ने के आसार हैं। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के कुमांऊ मंडल संयोजक ने केस को वापस लेने, आरोपी पुलिस कर्मियों और षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित पक्ष एडीजी से मिलकर इस प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर चुका है। 23 जुलाई को संघ के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पवार के नेतृत्व में कोतवाली का घेराव किया जाएगा।
गौरतलब है कि एक निजी अस्पताल संचालक और भाजपा नेता मुकेश चावला ने 15 जुलाई को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आयुष रावत नाम के एक युवक ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम से इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाई है। उसने मुख्यमंत्री और सरकार की छवि खराब करने से संबंधित पोस्ट की है। यह पोस्ट सरकार के प्रति विद्रोह और अपमान का कृत्य है। तहरीर पर पुलिस ने आयुष को उसके घर से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया है। इस प्रकरण में उत्तराखंड बेरोजगार संघ के कुमांऊ मंडल संयोजक भूपेंद्र सिंह कोरंगा, समाजसेवी कुसुमलता बौड़ाई, आयुष रावत व उनकी मां अंजू रावत शनिवार को मीडिया से रू-ब-रू हुए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसरोकार से जुड़ी आवाजों को दमनात्मक तरीके से दबाया जा रहा है। मूल निवास, भू कानून और बेरोजगारी का मुद्दा उठाने वालों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। प्रतापपुर निवासी आयुष रावत पर सीएम के नाम से फर्जी आईडी बनाने और सरकार की छवि धूमिल करने का आरोप लगाकर उसे रात भर थाने में बैठाया गया और यातनाएं दी गईं। भूपेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि इस प्रकरण में वह पूरे साक्ष्यों के साथ देहरादून में एडीजी एपी अंशुमान से मिल चुके हैं। आयुष रावत ने कहा है कि उस पर झूठा मुकदमा कराने वाले व्यक्ति और थाने में बैठाकर टार्चर करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो, उसके खिलाफ केस वापस हों और उसका मोबाइल लौटाया जाए। भूपेंद्र सिंह कोरंगा ने बताया कि इस प्रकरण में कार्रवाई नहीं होने पर 23 जुलाई को बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग कोतवाली का घेराव करेंगे। इस प्रदर्शन में उत्तराखंड के मुद्दों पर सजग लोग शामिल रहेंगे।
आयुष रावत को नहीं, पुलिस को है काउंसलिंग की जरूरत
उत्तराखंड बेरोजगार संघ के कुमांऊ मंडल संयोजक भूपेंद्र सिंह कोरंगा का कहना है कि आयुष रावत के खिलाफ दर्ज किया गया, केस गैर जमानतीय धाराओं का था। कायदे में उसे सिर्फ 41 सीआरपीसी का नोटिस देना था, लेकिन पुलिस कर्मियों ने उसे करीब 20 घंटे थाने में रखकर काउंसलिंग के नाम पर उसका उत्पीड़न किया। कोरंगा ने कहा कि वास्तव में काउंसलिंग की जरूरत आयुष को नहीं, बल्कि गैर कानूनी तौर पर उसे प्रताड़ित करने वाले पुलिस कर्मियों को है, इसलिए उनकी काउंसिलिंग की जानी चाहिए।

