आफ़त: आम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं बंदर और आवारा कुत्ते, रोजाना अस्पताल पहुंच रहे घायल

आफ़त: आम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं बंदर और आवारा कुत्ते, रोजाना अस्पताल पहुंच रहे घायल
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कोटद्वार।  नगर में लगातार खूंखार हो रहे बंदर और आवारा कुत्ते अब आमजन के लिए मुसीबत बन गए हैं। हालत यह है कि बेस अस्पताल में एक माह के भीतर कुत्ते और बंदर के काटने के दो सौ से अधिक मामले पहुंच चुके हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार तंत्र समस्या को लेकर लापरवाह बना हुआ है। कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा वार्ड हो जहां उत्पाती बंदर और आवारा कुत्ते न दिखाई दें। सुबह से ही बंदर घरों में व कुत्ते गलियों में उत्पात मचाना शुरू कर देते हैं। बंदरों के कारण वार्डवासियों का अपने घरों की छत पर कपड़े व अनाज सुखाना भी मुश्किल हो गया है। वहीं, गलियों में घूम रहे आवारा कुत्ते भी चुनौती बन रहे हैं। आवारा कुत्तों के झुंड राह चलते लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं।
स्थानीय निवासी सोनिका, रोहित, अजय, मोहन, चंदर आदि ने बताया कि कुत्तों व बंदरों के डर से बच्चों ने घर के बाहर खेलना भी छोड़ दिया है। अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने व लेने के लिए साथ में जाना पड़ रहा है। यही नहीं बंदरों ने तो घरों के बाहर खेतों में लगाई गई साग-सब्जियों को भी बर्बाद कर दिया है। शहरवासियों ने नगर निगम व वन विभाग से आवारा कुत्तों व बंदरों के आतंक से निजात दिलवाने की मांग की है। नगर आयुक्त वैभव गुप्ता का कहना है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए लगातार टीमें जा रही हैं। कहा कि अभियान लगातार जारी रहेगा।

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