किल्लत: गैस की समस्या से जूझ रहा पर्यटन स्थल चकराता, कई प्रतिष्ठान बंदी के कगार पर
विकासनगर। जौनसार बावर का केंद्र बिंदु कहे जाने वाली पर्यटन नगरी चकराता इन दिनों गैस की समस्या से जूझ रही है। क्षेत्र में कॉमर्शियल गैस की अनियमित आपूर्ति ने रेस्टोरेंट और ढाबा कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिससे उनका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई संचालकों को प्रतिष्ठान या दुकानें बंद करने की मजबूरी आने लगी है। चकराता बाजार और आसपास संचालित छोटे बड़े रेस्टोरेंट, होटल ढाबों और टी स्टॉल संचालकों का कहना है कि जबसे गैस संकट हुआ है तब से कॉमर्शिल गैस सिलेंडर उपलब्ध ही नहीं हो पा रहे हैं। घरेलू गैस के साथ कॉमर्शियल गैस की किल्लत के चलते अपने प्रतिष्ठान में भोजन तैयार करना मुश्किल हो गया है, इसका सीधा असर उनकी लागत पर पड़ रहा है और समान भी महंगा करना पड़ रहा है। रेस्टोरेंट संचालक दिनेश चांदना, रविंद्र चौहान, रविंद्र रावत, विवेक कुमार, राम सिंह चौहान, पंकज कुमार जैन और उदय बहादुर आदि ने बताया कि उन्हें डीजल भट्टी लकड़ी और कोयले पर काम करना पड़ रहा है जिससे लागत बढ़ रही है और काम भी पूरा नहीं हो रहा है। कहा कि जल्द ही गैस आपूर्ति नही हुई तो उन्हें मजबूरन अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़ सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कॉमर्शियल गैस वितरण की व्यवस्था की जाए ताकि उनका रोजगार सुरक्षित रह सके।
सार्वजनिक आयोजनों पर भी दिखने लगा असर
ख़ास बात यह है कि घरों के साथ ही सार्वजनिक आयोजनों पर भी गैस किल्लत का असर दिख रहा है। गुरुवार को हनुमान जयंती पर विभिन्न मंदिरों में हुए भंडारों पर इसका असर साफ देखा गया। अक्सर हर भंडारे में कढ़ी,चावल के साथ पूरी और आलू की सब्जी परोसी जाती थी। लेकिन इस बार अधिकतर भंडारों में कढ़ी-चावल ही श्रद्धालुओं का परोसा गया। साथ ही सभी जगह भंडारे का खाना गैस चूल्हों की जगह लकड़ी में पकाया गया। युद्ध का असर अब धीरे-धीरे और गहराने लगा है। खासकर कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने के कारण सार्वजनिक आयोजनों, भंडारों के साथ ही होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों पर इसका बड़ा असर देखा जा रहा है। कई होटल, ढाबे और खोखे, बंद हो चुके हैं। जबकि इनसे अपनी आजीविका चलाने वाले लोगों ने दूसरा धंधा शुरू कर दिया है। जो व्यक्ति दाल, चावल के साथ चाय का भी धंधा करता था। वह चाय बनाने तक सिमट गया है। जिस ढाबे पर कढ़ी, चावल, पराठे, रोटी, सब्जी मिलती थी, वहां गैस किल्लत के कारण केवल कढ़ी, दाल चावल ही मिल रहे हैं।

