स्मरण: माताश्री राजेश्वरी देवी का जीवन अध्यात्म ज्ञान एवं मानव सेवा को रहा समर्पित

स्मरण: माताश्री राजेश्वरी देवी का जीवन अध्यात्म ज्ञान एवं मानव सेवा को रहा समर्पित
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जयंती पर आयोजित जनकल्याण समारोह में बोले श्री भोले जी महाराज

नई दिल्ली। विश्व की महान आध्यात्मिक विभूति माता श्री राजेश्वरी देवी की पावन जयंती श्री हंसलोक आश्रम, छतरपुर, दिल्ली में मातृशक्ति दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस मौके पर हंस ज्योति-ए यूनिट आफ हंस कल्चरल सेंटर द्वारा परमपूज्य श्री भोले जी महाराज एवं माताश्री मंगला जी के सानिध्य में वैदिक विधि विधान के साथ दो दिवसीय विशाल जनकल्याण समारोह का शुभारम्भ हुआ।

सर्वप्रथम मंच पर श्री भोले जी महाराज और माताश्री मंगला जी ने योगीराज श्री हंस जी महाराज तथा जगतजननी माता श्री राजेश्वरी देवी की प्रतिमाओं के समक्ष नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर श्री भोले जी महाराज ने कहा कि माता श्री राजेश्वरी देवी अपने समय की ऐसी महान आध्यात्मिक विभूति थीं जिन्होंने अपना सारा जीवन अध्यात्म ज्ञान के प्रचार-प्रसार, परोपकार और मानव सेवा में लगाया। श्री भोले जी महाराज ने माताश्री राजेश्वरी देवी के प्रिय भजनों– “भाव का भूखा हूं मैं और भाव ही एक सार है तथा अपनी हस्ती जो तेरे चरणों में मिटा देते हैं” –की प्रस्तुति कर श्रद्धालु-भक्तों को भावविभोर कर दिया।

इस मौके पर महान आध्यात्मिक विभूति माता श्री राजेश्वरी देवी की महिमा का गुणगान करते हुए माताश्री मंगला जी ने कहा कि माताश्री राजेश्वरी देवी दया, करुणा, प्रेम, और वात्सल्य की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं इसलिए आज भी देश-विदेश में फैले करोड़ों भक्त उन्हें जगतजननी माता के नाम से पुकारते हैं। माताश्री राजेश्वरी देवी ने करोड़ों लोगों के हृदय में ज्ञान की ज्योति जलाकर उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया।

माताश्री मंगला जी ने कहा कि आज माताश्री राजेश्वरी देवी और श्री हंस जी महाराज के नाम पर द हंस फाउंडेशन, हंस कल्चरल सेंटर और श्री हंसलोक जनकल्याण समिति आदि संस्थाओं का संचालन किया जा रहा है। ये सभी संस्थाएं मानव समाज के कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं। समारोह के दौरान विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक संगठनो तथा संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों ने पुष्प गुच्छ देकर श्री भोले जी महाराज और माताश्री मंगला जी का स्वागत किया।

समारोह में संस्था के वरिष्ठ प्रचारक संत-महात्माओं ने सत्संग विचारो से श्रद्धालु-भक्तों को लाभान्वित किया। भजन गायकों ने भक्ति भाव से जुड़े भजनों की प्रस्तुति कर लोगों को आनंद से सराबोर कर दिया।

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