न्याय: पशु व्यापारी की हत्या के मुकदमे का हुआ निस्तारण, अदालत से दोनों आरोपी बरी
अल्मोड़ा। सल्ट क्षेत्र में पशु व्यापारी की हत्या के मामले में अपर जिला सत्र न्यायाधीश अंजलि नौलियाल की अदालत ने आरोपी सुनील सिंह बिष्ट और वीरेंद्र कुमार को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और जांच प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां पाई हैं। मामले के अनुसार, 9 दिसंबर 2022 को मोहम्मद कफील ने अपने मामा अजीबुर्रहमान की गुमशुदगी की रिपोर्ट राजस्व उपनिरीक्षक उदयपुर, भिकियासैंण में दर्ज कराई थी। जांच के दौरान जड़पानी क्षेत्र में मृतक का शव बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 20 गवाह पेश किए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष मूलभूत परिस्थितियों को ठोस रूप से साबित करने में असफल रहा। शिकायतकर्ता की गवाही में विरोधाभास और व्यक्तिगत जानकारी का अभाव पाया गया, जिससे मामला संदिग्ध हो गया। कथित बरामदगी को भी अविश्वसनीय माना गया, क्योंकि उसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी और प्रक्रिया में खामियां थीं। न्यायालय ने यह भी कहा कि मामले में ‘अंतिम बार साथ देखे जाने’ का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही हत्या का कोई स्पष्ट मकसद साबित हो सका। चिकित्सा और फोरेंसिक साक्ष्य हत्या की पुष्टि करते हैं, लेकिन आरोपियों को घटना से जोड़ने में विफल रहे। डॉक्टर की गवाही के आधार पर न्यायालय ने कहा कि मृत्यु का समय अभियोजन पक्ष के दावे से मेल नहीं खाता। जहां अभियोजन ने हत्या 6 दिसंबर को होने का दावा किया, वहीं पोस्टमार्टम के अनुसार मृत्यु 8 या 9 दिसंबर को हुई प्रतीत होती है, जिससे मामले की समयरेखा पर सवाल खड़े हुए। इसके अलावा न्यायालय ने विवेचना पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच में निष्पक्षता और विश्वसनीयता की कमी रही। आरोपी के कथित इकबालिया बयान को भी भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत अस्वीकार्य माना गया, क्योंकि वह न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज नहीं था। इन सभी तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
