अटकलबाजी: राजपुर के नए थाना अध्यक्ष की कुछ ही घंटों बाद वापसी पर उठ रहे कई सवाल
देहरादून। उत्तराखण्ड का पुलिस विभाग अपनी कार्यशैली के तहत अकसर चर्चाओं में रहता है। ऐसा ही एक मामला दो दिन पूर्व राजधानी के पॉश इलाके राजपुर थाना क्षेत्र में हुए एक बड़े घटनाक्रम के तहत चर्चाओं में है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं।
बता दें कि दो दिन पूर्व राजपुर थाना इंचार्ज शैंकी कुमार देर रात राजपुर रोड की तरफ जा रहे थे। आरोप है कि वह शराब के नशे में थे और उन्होंने कई वाहनों को टक्कर मार दी। जब लोगों ने इसका विरोध किया तो थाना इंचार्ज शैंकी कुमार उनको रौब दिखाने लगे। मामले का वीडियो वायरल होेने पर अधिकरियों ने इसका संज्ञान लिया और उन्हें संस्पेड कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस विभाग ने उनकी जगह कालसी थाने के एसओ दीपक धारीवाल को राजपुर थाना इंचार्ज बना दिया, लेकिन पुलिस के ही आलाधिकारियों द्वारा महज कुछ घंटों बाद ही नया आदेश जारी करते हुए दीपक धारीवाल को वापस कालसी थाने भेज दिया गया। पुलिस के आलाधिकारियों की ओर से नई दलील देते हुए कहा गया है कि अब एसओ व एसएचओ की प्रोफाइल आडिट कराने के बाद ही उन्हें थाना व कोतवाली के चार्ज दिये जायेंगे और राजपुर थाना वैसे भी इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के लिए आरक्षित है।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब राज्य के अन्य कई थाने, जो इंस्पेक्टर रैंक के लिए आरक्षित हैं, अभी भी दरोगा स्तर के अधिकारी ही चला रहे हैं तो फिर पुलिस महकमे मेें अचानक इतनी हलचल कैसे हो गयी है। राजपुर क्षेत्र की गिनती वैसे भी राजधानी के बेहद पाश इलाकों में की जाती है। ऐसे में अधिकारी की तैनाती को लेकर बार-बार फैसले पलटने से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

