शाबाश : दिव्या देशमुख ने महिला शतरंज विश्व कप में रचा इतिहास, फाइनल में पहुंचने वाली बनी पहली भारतीय खिलाड़ी
नई दिल्ली। पहली बार महिला चेस विश्व कप में हिस्सा ले रही नागपुर की दिव्या देशमुख ने इतिहास रच दिया है. वो जॉर्जिया में जारी महिला चेस विश्व कप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं. उन्होंने सेमीफाइनल के दूसरे गेम में चीन की पूर्व विश्व चैंपियन झोंगयी टैन को 1.5-0.5 से हराकर ये उपलब्धि हासिल की. यह एक लंबी और उतार-चढ़ाव भरी लड़ाई थी जो 101 चालों तक चली.
इस जीत के साथ दिव्या प्रतिष्ठित कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला भी बन गई हैं. ये टूर्नामेंट अगले साल खेला जाएगा, जिससे मौजूदा महिला विश्व चैंपियन वेनजुन जू के प्रतिद्वंदी का फैसला होगा. दिव्या ने इससे पहले क्वार्टर फाइनल में चीन की दूसरी वरीयता प्राप्त झोंगसू झू और फिर साथी भारतीय ग्रैंडमास्टर डी हरिका को हराया था.
दूसरे सेमीफाइनल में, आंध्र प्रदेश की ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी ने चीन की शीर्ष वरीयता प्राप्त टिंगजी लेई के खिलाफ ड्रॉ खेला. ये मैच 75 चालों के बाद भी बराबरी पर समाप्त हुआ. हम्पी अब लेई से टाई-ब्रेकर में भिड़ेगी जिससे दूसरे फाइनलिस्ट का फैसला होगा. फाइनल मैच 28 जुलाई को खेला जाएगा.
दिव्या देशमुख का जन्म 9 दिसंबर 2005 को नागपुर में हुआ. दिव्या को शतरंज खेलने का शौक बचपन से ही थी इसलिए वो 5 साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू कर दिया था. दिव्या के माता पिता दोनों डॉक्टर हैं. उन्होंने अपने बेटी का हर मोड़ पर साथ दिया, जिसकी वजह से आज दिव्या देश का नाम रोशन कर रही है.
दिव्या ने महज सात साल की उम्र में 2012 में अंडर-7 नेशनल चैंपियनशिप जीती थी. उसके बाद से दिव्या ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई खिताब अपने नाम करती चली गई. उनकी कामयाबी ने उन्हें 2021 में महिला ग्रैंडमास्टर बना दिया, और वो ये उपलब्धि हासिल करने वली 22वीं महिला खिलाड़ी बन गईं. उसके बाद दिव्या ने 2023 में इंटरनेशनल मास्टर का खिताब भी प्राप्त कर लिया.

