यूक्रेन विवाद: वैश्विक शांति की विरोधी हैं साम्राज्यवादी ताकतें

यूक्रेन विवाद: वैश्विक शांति की विरोधी हैं साम्राज्यवादी ताकतें
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यूक्रेन पर रुस को समझदारी दिखाकर अमेरिका को अलग थलग करना चाहिए

अनन्त आकाश
यू क्रेन तथा रूस के मध्य तनाव आजकल चर्चाओं में है । साम्राज्यवादी अमेरिका की प्रभुत्ववादी साजिशों के तहत यूक्रेन को नाटो में शामिल करने को रूस द्वारा अपनी संप्रभुता को खतरे के रूप में देखा जा रहा है। वास्तव में फासीवादियों तथा साम्राज्यवादियों की यह साजिश रही है कि वे अपने हितों को साधने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं ,क्योंकि शान्तिपूर्ण विश्व में उनके हितों की रक्षा नहीं हो सकती । इसलिए उन्हें अपनी निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए कोई न कोई साजिश कर विश्व की गोलबंदी अपने पीछे करके रखनी होती है । वे कभी इराक में रसायन हथियार के नाम पर वहाँ तबाही मचाते हैं ,तो कभी सीरिया में, तो कभी अफगानिस्तान तो कभी परमाणु हथियार के नाम पर ईरान के पीछे पड़ जाते हैं ।इस प्रकार वे अपनी साजिशों को अन्जाम देने के लिए अन्धराष्ट्रवाद तथा साम्प्रदायिक, फूटफरस्त व अलगाववादी ताकतों का भी इस्तेमाल करते हैं । एक जमाना था वे कम्युनिस्ट देश वियतनाम को नेस्तनाबूद करने के लिए निकले थे किन्तु 20 साल की लड़ाई के बावजूद उन्हें मुंह की खानी पड़ी और उनकी यानि कि अमेरिका की शर्मनाक हार हुई थी। अफगानिस्तान में क्या हुआ ? अन्ततः अमेरिका को दुम दबाकर भागना पड़ा! इनकी काली करतूतों का खामियाजा वहाँ की जनता नारकीय जीवन बिता कर भुगत रही है। यही हाल द्वितीय विश्वयुद्ध में फासीवादियों का भी हुआ, जब हिटलर ने विश्व विजेता का ख्वाब लिए सोवियत संघ पर हमला किया। इस युद्ध में 7 करोड़ लोग मारे गये तथा दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तबाह हुआ। अकेले सोवियत संघ के 5 करोड़ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अन्तत: सोवियत प्रधानमन्त्री कामरेड स्टालिन के नेतृत्व में सोवियत लाल सेना ने फासीवाद को नेस्तनाबूद कर हिटलर को आत्महत्या करने के लिए विवश किया। कहने का अर्थ है कि जब भी फासीवादियों तथा साम्राज्यवादियों ने विश्व को अस्थिर करने की कोशिश की तब- तब उनको मुंह की खानी पड़ी । उम्मीद है कि देर सबेर रूस एवं यूक्रेन विवाद पर भी अमेरिका तथा नाटो देशों को ऐसा ही जबाब वहाँ की जनता देगी ।
हालांकि अमेरिका के एकतरफा रूख के बावजूद रूस तथा सभी पक्षों के मध्य बातचीत का लम्बा सिलसिला जारी है । रूस व यूक्रेन के मध्य ऐतिहासिक रूप से मजबूत सम्बन्ध रहे हैं ।सोवियत संघ के विघटन तथा तनाव के बावजूद भी रूस व यूक्रेन की सीमाऐं यथावत हैं तथा आपसी सम्बन्ध बने हुए हैं। बावजूद इसके अमेरिका एवं उसके मित्र राष्ट्र सोवियत रूस के खिलाफ जबर्दस्त प्रचार युद्ध चलाते रहे हैं ।आपको याद होगा कि इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के खिलाफ रासायनिक हथियार रखने का दुष्प्रचार अमेरिका ने दसों साल चलाए रखा , जब तक कि इराक तबाह नहीं हो गया। यही प्रचार सीरिया के राष्ट्रपति असद के खिलाफ चलाया जा रहा है। सन्दर्भवश यह बताना उचित होगा कि पीएम मोदी भी आजकल अपने साक्षात्कारों में खुलेआम कम्युनिस्ट विचार को देश के लिए खतरनाक बता रहे हैं। इसलिए कि कम्युनिस्ट ही उनकी साम्प्रदायिक ,फिरकापरस्त, कारपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ शुरुआती दौर से ही आन्दोलित हैं तथा जनता को संगठित कर रहे हैं । इस मायने में कम्युनिस्ट विचार खतरनाक धारा उन लोगों के लिए खतरनाक है कि कम्युनिस्ट साम्राज्यवादी तथा फासीवाद विचार के धुर विरोधी हैं तथा जनपक्षीय नीतियों के पक्षधर हैं ।
पिछले काफी वर्षों से अमेरिका सभी निशस्त्रीकरण तथा तमाम शान्ति समझौतों से धीरे धीरे पीछे हट रहा है ,जैसा कि उसका मूल चरित्र है।
सोवियत व्यवस्था में यूक्रेन में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर तथा विभिन्न राष्ट्रीयताओं तथा मान्यताओं को मानने वालों के मध्य संतुलन था , किन्तु सोवियत विघटन के बाद सत्ता से जुडे़ लोग जन आकांक्षाओं की पूर्ति करने में विफल रहे ,परिणामस्वरूप आर्थिक कठिनाईयां तथा सामाजिक परिदृश्य में बदलाव सुनिश्चित था । बढ़ती गरीबी तथा आर्थिक क्षेत्र को मुठ्ठीभर लोगों द्वारा नियंत्रित किये जाने का फायदा साम्राज्यवादियों द्वारा इस अवसर का लाभ आपसी सद्भाव बिगाड़ने के लिए किया गया। वर्तमान यूक्रेन तथा रूस के मध्य का तानव भी इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए कि अमेरिका के नेतृत्व में साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा जो खेल अन्यत्र खेला जा रहा है, उसका नवीन संस्करण यहाँ यूक्रेन एवं रूस विवाद में देखा जा सकता है। बावजूद व्यापक हितों को देखते हुए रूस ने यूक्रेन सहित अन्य देशों की अपनी तरफ से सभी प्रकार की सहायता जारी रखी, ताकि साम्राज्यवादियों की साजिश को नाकाम किया जा सके। इस सन्दर्भ में रूस एवं उसकी जनता के पास व्यापक अनुभव है। इसके लिए रूस को अपने आसपास के राष्ट्रों के साथ प्रगाढ़ रिश्ते कायम करते हुए पृथकतावादी रूस समर्थक अलगाववादियों को नि:शस्त्र करते हुए, यूक्रेन की सम्प्रभुता की गारंटी सुनिश्चित करते हुए उससे यानि यूक्रेन से सौहार्दपूर्ण रिश्ते के प्रयास तेज करने चाहिए तभी अमेरिकी साजिश को दरकिनार कर क्षेत्र में शान्ति एवं सद्भाव का माहौल कायम हो सकेगा।

(लेखक सीपीएम नेता हैं और इस लेख में व्यक्त विचार उनके अपने विचार हैं)

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