मानवीयता: ईश्वर की सेवा करने जैसा ही है बेजुबानों की सेवा करना
विवेक रंजन श्रीवास्तव
पशु-पक्षी हमारे पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं। वे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाते हैं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये बेजुबान जीव मानवता के नैसर्गिक मित्र हैं। पुरातन समय से मानव सुरक्षा तथा प्रेम के लिए ही नहीं आहार के लिए भी पशुओं के संग सहअस्तित्व में रहा है।
गर्मी का मौसम केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। अत्यधिक तापमान, जल की कमी और भोजन की अनुपलब्धता के कारण वे पीड़ित होते हैं। चूंकि पशु पक्षी अपनी पीड़ा को शब्दों में नहीं व्यक्त कर सकते, इसलिए यह मानवीय जिम्मेदारी है कि हम मौसम के अनुसार पालतू पशु पक्षियों की ही नहीं वरन यथा वांछित सभी प्राणियों की सहायता अपने-अपने परिवेश में अवश्य करें।
गर्मी में जल जीवनदायी बन जाता है। पशु-पक्षी भी प्यास से व्याकुल होते हैं। हमें अपने घर की छत, बालकनी, बगीचे या सार्वजनिक स्थलों पर पानी के बर्तन रखकर उनकी प्यास बुझाने का प्रयास करना चाहिए। पक्षियों के लिए ऊँचाई पर जलपात्र रखना अधिक सुरक्षित होता है। पानी को प्रतिदिन बदलना चाहिए ताकि वह ताज़ा और साफ बना रहे।

तेज धूप और लू से पशु-पक्षी भी थक जाते हैं। उन्हें आराम के लिए छायादार स्थान की आवश्यकता होती है। यदि हमारे पास पालतू पशु हैं, तो उन्हें छाया और हवादार स्थान पर रखें। पक्षियों के लिए पेड़-पौधे लगाना उपयोगी होता है। इससे न केवल उन्हें विश्राम का स्थान मिलता है, बल्कि घोंसला बनाने के लिए भी सहारा मिलता है।
गर्मी के मौसम में पशु पक्षियों को दाना पानी सहजता से नहीं मिलता, अत: पक्षियों के लिए दाना, चावल, फल या रोटी के टुकड़े दिए जा सकते हैं। पालतू
पशुओं को समय-समय पर पानी से नहलाना चाहिए या उनके शरीर पर पानी छिड़कना चाहिए, ताकि वे ठंडक महसूस करें। कुछ पक्षी जैसे गौरैया, कबूतर आदि नहाना पसंद करते हैं। उनके लिए ऐसे जलपात्र रखने चाहिए जिसमें वे स्नान कर सकें।
गर्मी के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। पशुओं के रहने के स्थान को स्वच्छ और कीटाणुरहित रखना जरूरी होता है। यदि कोई पशु सुस्त हो जाए या भोजन न करे, तो तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
सड़क पर घूमते आवारा पशु और पक्षी भी गर्मी से पीड़ित होते हैं। उनके लिए भी पानी और छाया की व्यवस्था करना, पशु पक्षियों को संरक्षण के लिए जागरूकता मानवता फैलाना , नई पीढ़ी तक परस्पर निर्भरता का पाठ पढ़ना भी जरूरी कार्य है।
पशु-पक्षियों के प्रति संवेदना का व्यवहार एक सभ्य समाज का परिचायक होता है।

