दुस्साहस: फर्जी हस्ताक्षर से कर डाले सिंचाई विभाग के पांच अधिकारियों के स्थानान्तरण, मुकदमा दर्ज़

दुस्साहस: फर्जी हस्ताक्षर से कर डाले सिंचाई विभाग के पांच अधिकारियों के स्थानान्तरण, मुकदमा दर्ज़
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देहरादून। फर्जी हस्ताक्षर कर सिंचाई विभाग के पांच अधिकारियों के स्थानान्तरण करने के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रमुख अभियन्ता सिंचाई विभाग सुभाष चन्द्र ने नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि शासन के आदेश 31 जनवरी 2025 द्वारा जयदीप सिंह, अपर सहायक अभियन्ता का स्थानान्तरण पीएमजीएसवाई, सिचाई खण्ड, चम्बा से अवस्थापना खण्ड उत्तरकाशी किया गया है। दूसरे शासनादेश आदेश 31 जनवरी 2025 द्वारा सुमित कुमार, अपर सहायक अभियन्ता का स्थानान्तरण पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड, कोटद्वार से पीएमजीएसवाई सिचाई खंड,श्रीनगर प्रथम किया गया है। तीसरा शासनादेश 31 जनवरी 2025 द्वारा चिंरजी लाल, अपर सहायक अभियन्ता का स्थानान्तरण जमरानी बांध,निर्माण खण्ड -2, हल्द्वानी से सिंचाई खंड, हल्द्वानी ,उपखण्ड -1 किया गया है। चौथा शासनादेश 19 नवम्बर 2024 द्वारा महेन्द्र पाल सिंह, सहायक अभियन्ता का स्थानान्तरण पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड ज्योलीकोट, नैनीताल से उपखंड प्रथम सिंचाई खंड नैनीताल किया गया है। पांचवां शासनादेश पत्रांक के द्वारा सिचाई अनुभाग -1 में सम्बद्ध अमित सेमवाल, कनिष्ठ सहायक को 19 फरवरी 2025 के पूर्वान्ह से कार्यमुक्त करते हुए,विभाग को वापस प्रत्यावर्तित किया गया है। सम्बन्धित अग्रेत्तर कार्यवाही में इनको इनके मूल कार्यालय सिंचाई कार्यमण्डल, श्रीनगर में भेज दिया गया है।
तहरीर में बताया गया है कि उपर्युक्त संबंधित डाक रनर दीपक शर्मा,जिसके द्वारा प्रमुख अभियन्ता कार्यालय एवं शासन के सिंचाई अनुभाग- 1/2 के मध्य डाक अंतरण किया जाता रहा है के द्वारा दूरभाष पर अवगत कराया गया है कि उसके द्वारा 06 फरवरी 2025 को समस्त डाक एकमुश्त रूप में शासन के सिंचाई अनुभागों से प्राप्त कर मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (कार्मिक अनुभाग-01) प्रमुख अभियन्ता कार्यालय, सिंचाई विभाग देहरादून को उपलब्ध करायी गई। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (कार्मिक अनुभाग-01) द्वारा यथा 06 फरवरी 2025 को ही प्राप्त डाक/पत्राचार को अपने हस्ताक्षर द्वारा मार्क करके संबधित प्रमुख अभियन्ता कार्यालय, सिंचाई विभाग, देहरादून के अनुभागों को अग्रसारित किया गया है। वस्तुतः प्रकरण में किसी भी कार्मिक के नाम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है,तदप्रभाव में इस कार्यालय स्तर से किसी को संदेहास्पद स्थिति अन्तर्गत, व्यक्तिगत रूप में चिन्हित /निर्धारित करने में कठिनाई परिलक्षित हो रही है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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