हैल्थ अलर्ट: सेहत के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है बहरापन

हैल्थ अलर्ट: सेहत के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है बहरापन
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तेज आवाज करने वाले उपकरणों से रहें दूर

बहरापन सेहत के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। हमारी जीवनशैली में बदलाव करके व कुछ सावधानियां बरतकर बहरेपन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है । इसलिए लोगों में जागरूकता लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 3 मार्च को ‘वर्ल्ड हियरिंग डे’ मनाया जाता है।
बहरापन के कई कारण होते हैं जो उम्र के अनुसार भी अलग -अलग हो सकते है। जन्मजात समस्या, कान में संक्रमण , वृद्धावस्था में कान की नस में कमजोरी के अलावा तेज शोर भी इसका एक कारण बन रहा है। मोबाइल के बढ़ते प्रयोग के साथ नाइट क्लब व तेज म्यूजिक सिस्टम के शोर से लाखों युवाओं की श्रवण क्षमता प्रभावित हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 35 वर्ष के लगभग एक अरब युवाओं को तेज शोर के कारण श्रवण क्षमता कमजोर होने का खतरा है।


श्रवण की क्षमता में कमी जन्मजात भी हो सकती है। अगर जल्द ही यह पता चल जाए कि बच्चे के सुनने में कमी है तो उसके इलाज के बेहतर परिणाम आते है । इसलिए सभी बच्चों की जन्म पर ही श्रवण क्षमता की जांच होनी चाहिए। इलाज में देरी पर ये बच्चे ढंग से बोलना नहीं सीख पाते। कान बहना एक आम समस्या है। लंबे समय से कान बहने का कारण पर्दे में छेद या हड्डी का गलाव होता है। यह ठीक हो सकती है। कान के ऐसे ज़्यादातर रोगो को दवा या शल्य चिकित्सा से ठीक किया जा सकता है ।
श्रवण क्षमता में कमी के कई कारणों को सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों और बचाव के उपायों के माध्यम से टाला जा सकता है। जन्मपूर्व और प्रसवकालीन अवधि से लेकर वृद्धावस्था तक श्रवण क्षमता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं में कान की देखभाल पर जोर देना होगा। आधुनिक तकनीक के इस युग में हमें शोर के सुरक्षित स्तर पर ध्यान देना होगा। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो श्रवण शक्ति पर दुष्प्रभाव भुगतने पड़ सकते हैं। मोबाइल, म्यूजिक सिस्टम का प्रयोग केवल जरूरी होने पर व सुरक्षित स्तर पर ही करना होगा। तेज पटाखों, लाउडस्पीकर के तेज शोर से भी बचें। शोर जनित बहरापन का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है, बचाव ही एकमात्र उपाय है। समय रहते हमारे कानों की सेहत पर ध्यान देना अब नितांत आवश्यक हो गया है ।

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