उत्साह: श्रीराम मंदिर के बाद अब साधु-संतों ने मथुरा और ज्ञानवापी को लेकर खोला मोर्चा, सियासी बयानबाजी शुरू

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संसदीय चुनाव में सनातनियों से मोदी को जिताने का आह्वान

हरिद्वार। श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब मथुरा और ज्ञानवापी को लेकर साधु संतों ने मोर्चा खोल दिया है। अयोध्या से लौटे साधु संतों द्वारा जहां एक ओर रामलला के प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर की तारीफ की जा रही है, वहीं उनमें ज्ञानवापी और मथुरा की भी उम्मीद जग गई है। साधु संतों का कहना है कि अब अयोध्या तो हमारा हो गया है और जल्दी ज्ञानवापी और मथुरा में भी सनातन धर्म का डंका बजने वाला है।
गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस पर पतंजलि योगपीठ में स्वामी रामदेव ने कहा था कि यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि कुछ स्थानों पर मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी, जिसे मुसलमान खुद मानते हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि उन्हें लगता है कि इन मामलों में कोर्ट कचहरी न जाकर आपसी सहमति से ही हिंदुओं के मूल आस्था के केंद्र काशी, मथुरा, ज्ञानव्यापी या फिर और जो भी हमारे सनातन धर्म के मूल स्थान हैं वो मुस्लिम भाइयों को प्रेम पूर्वक ही अपने आप सनातन धर्मियों को सौंप देने चाहिए, जिससे देश में एक धार्मिक सद्भावना का नया कीर्तिमान बनेगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा कि सनातनधर्मियों को 2024 में सोचना होगा कि किसकी सरकार चाहिए। आज के समय में एक ही प्रधानमंत्री है जो कि उन्हें ज्ञानवापी और मथुरा वापस दिला सकते हैं, वह हैं नरेंद्र मोदी। हमें 2024 में यह देखना होगा कि कौन सी सरकार सनातन के साथ है और कौन सी सरकार सनातन के साथ नहीं है। इसलिए पूरे हिंदू सनातनियों को जागना होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ देना होगा, तभी जाकर मथुरा और ज्ञानवापी वापसी मिल सकते हैं।

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