कारोबार: कूड़े में फेंके जाने वाले बाल बने हजारों की कमाई का जरिया, हल्द्वानी की गलियों में घूम रहे खरीदार!

कारोबार: कूड़े में फेंके जाने वाले बाल बने हजारों की कमाई का जरिया, हल्द्वानी की गलियों में घूम रहे खरीदार!
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देहरादून । इंसान की जिंदगी में ऐसी कई चीजें होती हैं, जिन्हें वह बेकार समझकर बिना सोचे-समझे कूड़ेदान में डाल देता है। लेकिन बाजार का गणित कई बार ऐसा होता है कि वही बेकार समझी जाने वाली चीज किसी दूसरे के लिए सोना साबित हो जाती है। हल्द्वानी में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। महिलाओं के सिर से निकलकर कंघी में फंसने वाले और फिर कूड़ेदान में पहुंच जाने वाले बाल अब कारोबारियों के लिए कीमती सामान बन गए हैं। शहर की गलियों और मोहल्लों में ऐसे खरीदार घूम रहे हैं, जो घरों से महिलाओं के बाल खरीदने की पेशकश कर रहे हैं। खरीदारों का दावा है कि अच्छी गुणवत्ता वाले बालों की कीमत 10 हजार रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है।
अब तक जिन बालों को महिलाएं साफ-सफाई के दौरान बेकार समझकर फेंक देती थीं, उन्हीं बालों को इकट्ठा करने के लिए खरीदार घर-घर दस्तक दे रहे हैं। मोहल्लों में घूमकर लोगों से पूछताछ की जा रही है और बालों के बदले नकद भुगतान का प्रस्ताव दिया जा रहा है। इस अनोखे कारोबार की चर्चा ने लोगों को हैरान कर दिया है। कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर कंघी में रोजाना निकलने वाले बाल इतने कीमती कैसे हो गए कि उनकी कीमत हजारों रुपये किलो तक पहुंच रही है?
आमतौर पर महिलाओं के बालों की देखभाल के दौरान रोजाना कुछ बाल टूटकर निकलते हैं। नहाते समय, कंघी करते हुए या बालों को संवारने के दौरान निकलने वाले इन बालों को घरों में इकट्ठा करने के बजाय फेंक दिया जाता है। लेकिन बालों के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए यही बाल कमाई का जरिया बन सकते हैं। बताया जा रहा है कि खरीदार घरों और मोहल्लों से बाल एकत्र करते हैं। इसके बाद इन्हें उनकी लंबाई, गुणवत्ता और स्थिति के आधार पर अलग-अलग किया जाता है। अच्छी गुणवत्ता वाले बालों को आगे प्रसंस्करण और बिक्री के लिए भेजा जाता है। यही वजह है कि अब ऐसे बालों की तलाश में खरीदार शहर की गलियों में घूमते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, प्राकृतिक मानव बालों का इस्तेमाल सौंदर्य उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनसे विग, हेयर एक्सटेंशन, हेयर पैच और अन्य हेयर प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। जिन लोगों के बाल कम हैं, झड़ गए हैं या किसी कारण से सिर पर बाल नहीं हैं, उनके लिए प्राकृतिक बालों से बने विग और हेयर पैच उपयोगी साबित होते हैं।
फैशन और ब्यूटी इंडस्ट्री में भी हेयर एक्सटेंशन का चलन बढ़ा है। कई लोग अपने छोटे बालों को लंबा दिखाने या हेयर स्टाइल में बदलाव करने के लिए एक्सटेंशन का इस्तेमाल करते हैं। प्राकृतिक बालों से बने उत्पादों को कई ग्राहक पसंद करते हैं। इसी मांग के चलते मानव बालों का कारोबार एक बड़े बाजार का रूप ले चुका है। खरीदारों की ओर से 10 हजार रुपये प्रति किलो तक कीमत दिए जाने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के बाल इसी भाव पर खरीदे जाएंगे। बालों की लंबाई, मजबूती, रंग, सफाई और उनकी गुणवत्ता कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लंबे, स्वस्थ, साफ और कम उलझे बालों की उपयोगिता अधिक हो सकती है। वहीं छोटे, टूटे हुए और अलग-अलग लंबाई के बालों का भाव कम हो सकता है। बाजार में बालों की ग्रेडिंग और उनकी प्रोसेसिंग के बाद ही वास्तविक कीमत निर्धारित होती है। इसलिए 10 हजार रुपये प्रति किलो के दावे को सभी प्रकार के बालों की सामान्य दर मानना उचित नहीं होगा। इस भाव की स्वतंत्र बाजार पुष्टि भी जरूरी है। बालों के इस कारोबार में केवल खरीद-बिक्री ही नहीं, बल्कि उनके संग्रह और प्रसंस्करण की भी लंबी प्रक्रिया होती है। अलग-अलग घरों और स्थानों से एकत्र किए गए बालों को पहले छांटा जाता है। इसके बाद उनकी लंबाई और गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग श्रेणियां बनाई जाती हैं। बालों को साफ करने, सुलझाने और उपयोग के योग्य बनाने की प्रक्रिया से गुजारा जाता है।
इसके बाद इन्हें विग, एक्सटेंशन और अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों तक पहुंचाया जाता है। तैयार उत्पादों की बिक्री घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हो सकती है। हालांकि हल्द्वानी में घूम रहे खरीदार बालों को किस कारोबारी नेटवर्क या प्रसंस्करण इकाई तक पहुंचा रहे हैं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
इस कारोबार की सबसे दिलचस्प बात यह है कि घरों में बेकार समझे जाने वाले बाल अब आर्थिक मूल्य हासिल कर रहे हैं। जिन महिलाओं के लंबे बाल हैं और वे नियमित रूप से बालों को संवारने या कटवाने के दौरान निकलने वाले बालों को इकट्ठा करती हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त आमदनी का विकल्प बन सकता है। हालांकि बाल बेचने से पहले खरीदार की विश्वसनीयता, वजन करने का तरीका, भुगतान की प्रक्रिया और बालों की गुणवत्ता के आधार पर तय होने वाले भाव की जानकारी लेना जरूरी है। केवल 10 हजार रुपये किलो के दावे के आधार पर सौदा करना ठीक नहीं होगा। शहर में बाल खरीदने वालों की आवाजाही ने एक ऐसे कारोबार की ओर लोगों का ध्यान खींचा है, जिसके बारे में आमतौर पर बहुत कम चर्चा होती है। बाजार में जहां लोग सोना, चांदी, तांबा और अन्य कीमती सामान की खरीद-बिक्री को जानते हैं, वहीं अब महिलाओं के बालों की भी कीमत लगाई जा रही है। यह कारोबार एक बार फिर बताता है कि कचरा हमेशा बेकार नहीं होता। सही बाजार और उपयोग मिल जाए तो फेंकी जाने वाली चीज भी कमाई का साधन बन सकती है। हल्द्वानी की गलियों में घूम रहे बाल खरीदार इसी बदलते बाजार की एक दिलचस्प तस्वीर पेश कर रहे हैं।

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