हालात: दो दिन की रौनक के बाद फिर पसरा सन्नाटा, गैरसैंण को सालभर गुलजार करने की चुनौती

हालात: दो दिन की रौनक के बाद फिर पसरा सन्नाटा, गैरसैंण को सालभर गुलजार करने की चुनौती
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गैरसैंण। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर में दो दिन तक रही राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की गहमागहमी सत्र समाप्त होते ही थम गई। मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही से गुलजार रहने वाला परिसर एक बार फिर शांत हो गया। सदन की कार्यवाही स्थगित होते ही सरकारी काफिलों की वापसी शुरू हुई और इसके साथ ही विधानसभा परिसर से लेकर आसपास के क्षेत्र तक चहल-पहल सिमटने लगी।
दो दिन पहले तक जहां वाहनों की आवाजाही, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और प्रशासनिक गतिविधियों के चलते गैरसैंण में राजधानी जैसा माहौल दिखाई दे रहा था, वहीं सत्र की समाप्ति के बाद फिर वही खामोशी लौट आई। यह स्थिति एक बार फिर इस सवाल को सामने ला रही है कि आखिर गैरसैंण को सालभर सक्रिय रखने के लिए सरकारी स्तर पर गतिविधियों का विस्तार कब और किस तरह होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही गैरसैंण को सालभर गुलजार रखने के लिए योजनाएं तैयार किए जाने की बात कह चुके हैं। अब इन योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में होने वाली पहल पर निगाहें टिकी हैं।
भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन होते ही गैरसैंण की तस्वीर कुछ समय के लिए बदल जाती है। विधानसभा परिसर में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी बढ़ जाती है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर परिवहन, आवास, भोजन और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सरकारी मशीनरी जुट जाती है। सत्र के दौरान क्षेत्र की सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बढ़ती है और स्थानीय स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो जाती हैं।
इस बार भी दो दिवसीय सत्र के दौरान सदन में अनुपूरक बजट समेत विभिन्न महत्वपूर्ण विधेयकों पर कार्यवाही हुई। राजनीतिक चर्चाओं और प्रशासनिक गतिविधियों के चलते गैरसैंण एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहा। लेकिन सत्र की अवधि सीमित होने के कारण यह रौनक ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। कार्यवाही पूरी होते ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की वापसी शुरू हुई और विधानसभा परिसर की हलचल धीरे-धीरे समाप्त हो गई।
गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा मिलने के बाद से ही यहां नियमित प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ाने और क्षेत्र को स्थायी विकास की धारा से जोड़ने की अपेक्षाएं बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि विधानसभा सत्र के आयोजन तक सीमित रहने के बजाय यहां ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, जिनसे पूरे साल लोगों की आवाजाही बनी रहे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिले।
सत्र के दौरान दिखाई देने वाली चहल-पहल यह बताती है कि सरकारी गतिविधियों के विस्तार से क्षेत्र में सक्रियता बढ़ सकती है। इसके विपरीत, सत्र समाप्त होते ही लौटने वाला सन्नाटा नियमित प्रशासनिक उपस्थिति, रोजगार के अवसरों, बेहतर परिवहन और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत को रेखांकित करता है।
गैरसैंण को सालभर सक्रिय रखने के लिए केवल सरकारी बैठकों या विधानसभा सत्रों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए प्रशासनिक कार्यालयों की नियमित उपस्थिति, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, सड़क एवं परिवहन व्यवस्था में सुधार, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन देने जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा। इन व्यवस्थाओं के विस्तार से क्षेत्र में स्थायी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
गैरसैंण में विधानसभा सत्र के संचालन पर होने वाला खर्च भी चर्चा का विषय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सत्र के सफल संचालन के लिए प्रतिदिन करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया जाता है। इसमें बिजली, पानी, भोजन, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े खर्च शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने तथा सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने के लिए बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाती है।
सत्र के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों के आने-जाने, ठहरने तथा भोजन की व्यवस्था पर भी संबंधित विभागों को खर्च करना पड़ता है। विभिन्न विभागों के वाहनों की आवाजाही और पूरे प्रशासनिक अमले की तैनाती से व्यय का दायरा बढ़ जाता है। हालांकि, प्रतिदिन होने वाले खर्च के इस अनुमान का आधिकारिक मदवार विवरण उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि वास्तविक लागत का आकलन किया जा सके।
इतने बड़े संसाधन और धनराशि खर्च होने के बाद स्वाभाविक रूप से यह अपेक्षा भी रहती है कि गैरसैंण को इसका दीर्घकालिक लाभ मिले। सत्र के आयोजन से आगे बढ़कर यदि यहां नियमित गतिविधियां विकसित होती हैं, तो सरकारी निवेश का लाभ स्थानीय आबादी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकता है।
भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में गतिविधियां बढ़ाने की दिशा में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी की पहल पर लाइब्रेरी का निर्माण किया जा रहा है। इस लाइब्रेरी को स्थानीय लोगों के लिए खोलने की योजना है। इससे क्षेत्र के युवाओं और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने की उम्मीद है।
विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, यदि स्थानीय युवा लाइब्रेरी में रुचि दिखाते हैं तो दिवालीखाल से बच्चों को लाइब्रेरी तक लाने और वापस पहुंचाने के लिए परिवहन सेवाएं विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा। यह पहल विधानसभा परिसर को केवल सत्र के दौरान इस्तेमाल होने वाले स्थान के बजाय स्थानीय समुदाय और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
हालांकि, लाइब्रेरी की उपयोगिता उसके नियमित संचालन, पर्याप्त पुस्तकों, अध्ययन सामग्री, इंटरनेट सुविधा और परिवहन व्यवस्था पर भी निर्भर करेगी। यदि इन सुविधाओं को प्रभावी तरीके से विकसित किया जाता है, तो इससे स्थानीय युवाओं को लाभ मिलने के साथ विधानसभा परिसर में सालभर सीमित ही सही, लेकिन नियमित गतिविधियां बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
गैरसैंण में सत्र के दौरान दिखाई देने वाली रौनक और उसके बाद लौटने वाला सन्नाटा अब एक परिचित स्थिति बन चुकी है। ऐसे में सालभर गतिविधियां बनाए रखने की योजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर अपेक्षाएं बढ़ी हुई हैं। मुख्यमंत्री की ओर से इस दिशा में योजनाएं बनाए जाने की बात के बाद अब उनके स्वरूप, समयसीमा और क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टता जरूरी है। यदि गैरसैंण में नियमित सरकारी गतिविधियों, शिक्षा, पर्यटन, परिवहन और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जाता है, तो क्षेत्र को स्थायी रूप से विकास की धारा से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रगति हो सकती है। विधानसभा परिसर में बन रही लाइब्रेरी इस दिशा में एक शुरुआती पहल है, लेकिन व्यापक बदलाव के लिए समन्वित योजना और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होगी। दो दिन के सत्र के बाद भराड़ीसैंण में लौटा सन्नाटा केवल विधानसभा परिसर की खामोशी नहीं, बल्कि गैरसैंण को सालभर सक्रिय रखने की चुनौती की याद भी दिलाता है। अब देखना यह है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी को नियमित गतिविधियों का केंद्र बनाने की घोषणा योजनाओं से आगे बढ़कर जमीन पर कितनी उतर पाती है।

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