भिड़ंत: गैरसैंण में सड़क से सदन तक संग्राम, बैरिकेडिंग पर भिड़े आंदोलनकारी और पुलिस
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान सड़क से सदन तक सियासी टकराव देखने को मिला। गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने, पर्वतीय क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और जर्जर सड़कों जैसे मुद्दों को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी), कांग्रेस, प्रधान संगठन और सुराज सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने विधानसभा कूच किया। प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर पुलिस की बैरिकेडिंग पार करने का प्रयास किया, जबकि कुछ जगहों पर लोहे के गेट और कंटीले तारों से बने अवरोधों को हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की गई। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी झड़प, धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया।
उधर, विधानसभा के भीतर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने काले झंडे दिखाकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब तथा निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 231.91 करोड़ रुपये की 12 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। एक ओर सरकार विकास योजनाओं के जरिए अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखती रही, तो दूसरी ओर विपक्ष और क्षेत्रीय संगठनों ने राजधानी, भ्रष्टाचार और पर्वतीय क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया।
लोहे के गेट और कंटीले तारों की बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश
विधानसभा सत्र के पहले दिन मंगलवार को विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे यूकेडी, कांग्रेस, प्रधान संगठन और सुराज सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के बीच विधानसभा की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों को परिसर तक पहुंचने से रोकने के लिए पांडुवाखाल, मेहलचौरी, कालीमाटी, जंगलचट्टी और दिवालीखाल सहित कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी। संवेदनशील मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरियर पार करने की कोशिश की।
कुमाऊं की ओर से आने वाले कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच सुबह से ही तनातनी बनी रही। मेहलचौरी पुल पर यूकेडी कार्यकर्ताओं ने लोहे का गेट उखाड़कर रामगंगा नदी में फेंक दिया। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनाव और बढ़ गया। वहीं, कालीमाटी बैरियर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, गणेश गोदियाल और मुकेश नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। रास्ता नहीं खुलने के कारण काफी देर तक आवागमन प्रभावित रहा। बताया गया कि कांग्रेस के कुछ नेता जंगल के पथरीले रास्तों से होते हुए दिवालीखाल पहुंचे।
दूसरी ओर, यूकेडी के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दोपहर तक दिवालीखाल में कांग्रेस, यूकेडी, प्रधान संगठन और सुराज सेवा दल के कार्यकर्ता एकत्र हो गए। यहां बैरिकेडिंग के कई स्तरों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारी लोहे के गेट और कंटीले तारों से बने अवरोधों को पार करते हुए विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर बढ़ने का प्रयास करते रहे।
विधानसभा कूच के दौरान यूकेडी ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने का सवाल केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता और राज्य गठन की अपेक्षाओं से भी जुड़ा है।
नेगी ने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं पर वाटर कैनन के इस्तेमाल को अनुचित बताते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्थायी राजधानी की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे यूकेडी कार्यकर्ता, महिला मोर्चा की सदस्य, युवा और स्थानीय लोग शामिल रहे। आंदोलनकारियों ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और खराब सड़कों की मरम्मत की मांग भी उठाई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पहाड़ों में रहने वाले लोगों को आज भी उपचार, शिक्षा और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राजधानी और शासन-प्रशासन से जुड़ी व्यवस्थाओं को पर्वतीय क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है। हालांकि, इन मांगों पर सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध विवरण में नहीं है।
सदन के भीतर काले झंडे दिखाकर कांग्रेस का विरोध
विधानसभा के भीतर भी सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव का असर दिखाई दिया। कांग्रेस विधायकों ने काले झंडे दिखाकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विपक्ष ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने विधानसभा के भीतर और बाहर जारी विरोध को एक-दूसरे से जोड़ दिया। जहां विपक्ष सरकार को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर घेरता रहा, वहीं सड़क पर प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने स्थायी राजधानी और पर्वतीय क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं को लेकर अपनी मांगें सामने रखीं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 231.91 करोड़ रुपये की 12 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। ऐसे में सत्र के दौरान सरकार के विकास संबंधी कार्यक्रमों और विपक्ष के विरोध के बीच राजनीतिक खींचतान स्पष्ट दिखाई दी। विधानसभा की ओर बढ़ने के दौरान बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश में कई प्रदर्शनकारी गिरकर घायल हो गए। भीड़ को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिसकर्मियों ने घायलों की मदद कर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने घायल प्रदर्शनकारियों को सहारा दिया, उन्हें पानी पिलाया और प्राथमिक उपचार किट की मदद से घावों पर दवा लगाकर पट्टियां बांधीं। विरोध और धक्का-मुक्की के बीच पुलिसकर्मियों की इस पहल की मौके पर मौजूद लोगों ने सराहना की।
विधानसभा घेराव के दौरान एक तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी रही, तो दूसरी तरफ घायल लोगों की सहायता करते जवानों की तस्वीरें भी सामने आईं। इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि आंदोलन और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के बीच भी मानवीय संवेदना महत्वपूर्ण बनी रहती है। प्रदर्शन के मद्देनजर की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का असर आम लोगों की आवाजाही पर भी पड़ा। मार्गों पर बैरिकेडिंग और वाहनों को रोकने के कारण ग्रामीणों को मेहलचौरी और गैरसैंण बाजार तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। टैक्सी सेवाएं प्रभावित होने से यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
गोपेश्वर निवासी शिक्षक प्रकाश चंद्र कन्या का परिवार अपने बेटे की सगाई में शामिल होने के लिए तीन गाड़ियों से देहरादून जा रहा था। परिवार के अनुसार, उनकी गाड़ियां कालीमाटी बैरियर पर सुबह करीब नौ बजे से दोपहर दो बजे तक फंसी रहीं। करीब पांच घंटे तक रास्ते में रुकने के कारण परिवार को कार्यक्रम में पहुंचने को लेकर परेशानी हुई।
बताया गया कि कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल और मुकेश नेगी के हस्तक्षेप के बाद परिवार की एक गाड़ी को आगे जाने दिया गया, जबकि दो गाड़ियां बैरियर पर ही रुकी रहीं। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था के कारण आम यात्रियों को हुई परेशानी को भी सामने ला दिया। विधानसभा सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी रही, लेकिन रास्तों पर लंबे समय तक वाहनों के रोके जाने से स्थानीय लोगों और यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ऐसे हालात में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ आम नागरिकों की आवश्यक आवाजाही सुचारु बनाए रखना भी प्रशासन के सामने चुनौती बना रहा।
भराड़ीसैंण में हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। यूकेडी और अन्य प्रदर्शनकारी संगठनों ने इस मांग के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं को भी उठाया। वहीं, कांग्रेस ने सदन के भीतर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब और जांच की मांग के जरिए सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया।
विधानसभा सत्र के दौरान हुए घटनाक्रम ने यह स्पष्ट किया कि गैरसैंण का मुद्दा केवल राजधानी की घोषणा तक सीमित नहीं है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में शासन की पहुंच, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और स्थानीय लोगों की अपेक्षाएं भी जुड़ी हुई हैं। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और आंदोलनकारी संगठन आगे किस तरह की रणनीति अपनाते हैं, इस पर निगाहें रहेंगी।

