परंपरा: उत्पाल्टा और कुरौली के बीच हुआ पारंपरिक गागली युद्ध, ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग
चकराता (आरएनएस)। जौनसार-बावर में मंगलवार को पाईता पर्व (दशहरा) धूमधाम से मनाया गया। कालसी ब्लॉक के उत्पाल्टा गांव में पाईता पर्व पर उत्पाल्टा और कुरौली गांव के ग्रामीणों के बीच पारंपरिक गागली युद्ध आकर्षण का केंद्र रहा। अरबी के डंठलों से लड़े जाने वाले इस प्रतीकात्मक युद्ध में ग्रामीणों ने सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। युद्ध के बाद दोनों गांवों के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
पारंपरिक गागली युद्ध की सदियों पुरानी परंपरा
पर्व पर दोनों गांवों के ग्रामीण अपने-अपने सार्वजनिक स्थलों पर एकत्र हुए। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और रणसिंघे की गूंज के बीच हाथों में गागली के डंठल और पत्ते लेकर नाचते-गाते देवदार नामक स्थल पर पहुंचे। यहां बुजुर्गों और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ पारंपरिक गागली युद्ध में हिस्सा लिया। इस दौरान ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। खत के सदर स्याणा राजेंद्र राय ने बताया कि गागली युद्ध की परंपरा सदियों पुरानी है। इसके पीछे मुन्नी और रानी नाम की दो बहनों से जुड़ी लोककथा प्रचलित है। इसी मान्यता के अनुसार हर वर्ष पाईता पर्व पर यह आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस परंपरा का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के साथ आपसी सौहार्द को मजबूत करना भी है।
लोकगीतों और नृत्य से साझा कीं पर्व की खुशियां
गागली युद्ध संपन्न होने के बाद दोनों गांवों के ग्रामीणों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया और पाईता पर्व की बधाई दी। इसके बाद उत्पाल्टा गांव के सार्वजनिक स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर ग्रामीणों ने जौनसारी लोकनृत्य तांदी, रासो और हारुल प्रस्तुत किए। पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों के बीच ग्रामीणों ने पर्व की खुशियां साझा कीं। आयोजन में जौनसार-बावर की समृद्ध लोक संस्कृति और देव परंपराओं की झलक देखने को मिली।

