बैकफुट पर चुनाव आयोग : 30 दिन में बदले अपने ही नियम, फार्म -6 विवाद पर वोटर्स को दी बड़ी राहत

बैकफुट पर चुनाव आयोग : 30 दिन में बदले अपने ही नियम, फार्म -6 विवाद पर वोटर्स को दी बड़ी राहत
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नई दिल्ली (आरएनएस)। देश में मतदाता सूचियों के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” और नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रियाओं को लेकर मचे बवाल के बीच निर्वाचन आयोग ने कड़े रुख में नरमी लाते हुए कई बड़े बदलाव किए हैं। दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल तक उपजे विवाद और सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद आयोग ने नियमों को व्यावहारिक बनाते हुए नागरिकों को बड़ी राहत दी है। पिछले 30 दिनों में लागू इन बदलावों के तहत अब छूटे हुए मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने का अवसर मिलेगा और दुर्भावनापूर्ण ढंग से नाम कटवाने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए सख्त सीमाएं तय की गई हैं।
फॉर्म-6 से हटाया गया विवादित डिक्लेरेशन, बंगाल में लगा विशेष कैंप
नए मतदाताओं के पंजीकरण वाले फॉर्म-6 के साथ एसआईआर के दौरान जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन फॉर्म) को लेकर खासा विवाद खड़ा हुआ था, जिसमें पुरानी सूचियों और परिजनों से जुड़े जटिल विवरण मांगे गए थे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आयोग ने स्पष्टीकरण देते हुए इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को उन राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल से हटा दिया है जहां स्ढ्ढक्र संपन्न हो चुका है। वहीं, पश्चिम बंगाल के सभी 24 जिलों में विशेष अभियान शुरू कर शिविर लगाए जा रहे हैं, ताकि प्रक्रिया के दौरान छूटे सभी पात्र नागरिक दोबारा आवेदन कर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकें।
दिल्ली में 33 लाख में से 20 लाख गड़बड़ियां सुलझीं, 18 व 25 अक्टूबर को लगेंगे शिविर
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत सामने आई करीब 33 लाख गड़बड़ियों में से 20 लाख मामलों का निपटारा कर लिया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, ये गड़बड़ियां मुख्य रूप से 2002 की वोटर लिस्ट से मिलान न होने या रिकॉर्ड विसंगतियों से जुड़ी थीं। शेष मामलों के समाधान के लिए राष्ट्रीय राजधानी में 18 और 25 अक्टूबर को विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट भरोसा दिलाया है कि किसी भी वैध और पात्र मतदाता का नाम सूची से बेवजह नहीं काटा जाएगा।
नाम कटवाने वाले फॉर्म-7 पर लगाई कैप, घर-घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे बीएलओ
वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटवाने के दुरुपयोग को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने फॉर्म-7 जमा करने की संख्या सीमित कर दी है। नए नियम के तहत, एसआईआर के दौरान एक व्यक्ति अधिकतम 10 और सामान्य दिनों में प्रति माह केवल 5 फॉर्म-7 जमा कर सकेगा। नाम हटाने से पहले गहन जांच और संबंधित वोटर को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नोटिस पाने वाले नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए बीएलओ  खुद मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्रित कर पोर्टल पर अपलोड करेंगे, जिससे बुजुर्गों और जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिलेगी।

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