संकट:भारी मलबे व बोल्डरों से नया बैली ब्रिज भी टूटा, चीन सीमा का सड़क संपर्क बाधित
कुलागाड़ में मलबे-बोल्डर गिरने से पुल क्षतिग्रस्त, दारमा-व्यास-चौदास घाटियां भी प्रभावित; कृत्रिम झील बनने का खतरा
पिथौरागढ़। तवाघाट-धारचूला हाईवे पर कुलागाड़ में बनाया गया नया बैली ब्रिज कुछ ही दिन में दोबारा क्षतिग्रस्त हो गया। भारी मलबे और बोल्डर गिरने से पुल को नुकसान पहुंचा है। इसके चलते चीन सीमा, आदि कैलाश के साथ ही दारमा, व्यास और चौदास घाटियों का सड़क संपर्क बाधित हो गया है। मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
कुलागाड़ में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरकर पुल के आसपास जमा हो गए हैं। मलबे के कारण पानी के रुकने से यहां कृत्रिम झील बनने का खतरा भी पैदा हो गया है। संभावित खतरे को देखते हुए पुलिस ने काली नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मौके की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
पांच दिन में बनाया था नया पुल
कुलागाड़ में इससे पहले अगस्त में भारी बारिश और पहाड़ी से गिरे बोल्डरों के कारण पुराना बैली ब्रिज टूट गया था। इसके बाद बीआरओ ने युद्धस्तर पर काम करते हुए करीब 170 फीट लंबे नए बैली ब्रिज का निर्माण महज पांच दिन में पूरा किया था। पांच सितंबर को नए पुल से वाहनों की आवाजाही भी शुरू कर दी गई थी। अब दोबारा पुल क्षतिग्रस्त होने से सीमांत क्षेत्र में आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
सामरिक मार्ग पर फिर संकट
तवाघाट-धारचूला हाईवे सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह चीन सीमा के साथ ही आदि कैलाश, मानसरोवर क्षेत्र और दारमा, व्यास व चौदास घाटियों को जोड़ता है। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही के साथ सीमांत क्षेत्र में जरूरी सामान की आपूर्ति और सुरक्षा बलों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। लंबे समय तक मार्ग बंद रहने पर सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

