एक्शन: आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े पर सरकार का बड़ा , देश भर के 2,359 अस्पताल योजना से बाहर
नई दिल्ली(RNS) केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले अस्पतालों पर अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। मरीजों की फर्जी बिलिंग और नियमों की अनदेखी के आरोप में देशभर के 2,359 अस्पतालों को इस सरकारी योजना से बाहर (डी-एम्पैनल) कर दिया गया है। अगर आप या आपके परिजन भी आयुष्मान कार्ड की मदद से इलाज कराने की योजना बना रहे हैं, तो किसी भी अस्पताल में जाने से पहले यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।
एआई तकनीक से पकड़ी गई चोरी, करोड़ों का भारी जुर्माना
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने हाल ही में लोकसभा में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (A I) और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के हाई-टेक सिस्टम ने फर्जी क्लेम, एक ही मरीज के नाम पर दोबारा बिल और अनावश्यक जांच को पकड़कर 31 जुलाई 2026 तक करीब 676.14 करोड़ रुपये का सरकारी पैसा लुटने से बचाया है। सरकार ने गड़बड़ी करने वाले इन अस्पतालों पर कुल 328.49 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है और 29 मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। इसके अलावा 1,200 अन्य अस्पतालों को निलंबित किया गया है।
मरीजों के लिए अलर्ट, अस्पताल जाने से पहले पोर्टल पर करें चेक
सरकार के इस कड़े कदम का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, क्योंकि ब्लैकलिस्ट और सस्पेंड हो चुके अस्पतालों में अब आयुष्मान कार्ड के जरिए 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज नहीं मिल सकेगा। मरीजों को ऐन मौके पर किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए यह सलाह दी गई है कि वे भर्ती होने से पहले नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के पोर्टल पर जाकर अस्पताल की स्थिति जरूर चेक कर लें। राहत की बात यह है कि 8 अगस्त 2026 तक पूरे देश में 38,437 अस्पताल अभी भी इस योजना से जुड़े हुए हैं, जिनमें 20,363 सरकारी और 18,074 निजी अस्पताल शामिल हैं।
कार्रवाई के बीच योजना का तेजी से हो रहा विस्तार
भ्रष्टाचार पर इस चौतरफा प्रहार के बावजूद आयुष्मान भारत योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 3.75 करोड़ नए आयुष्मान कार्ड जारी किए गए और 2.74 करोड़ मरीजों के इलाज को अस्पताल में भर्ती होने की मंजूरी दी गई। केंद्र सरकार ने राज्यों को इलाज के खर्च के लिए 8,438.27 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा है, जहां 30.6 लाख मरीजों का इलाज हुआ और राज्य को 1,047.53 करोड़ रुपये का केंद्रीय फंड मिला है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन योजना का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

