बड़ी ख़बर: ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे तो ट्रंप छोड़ सकते हैं परमाणु समझौते की शर्त

बड़ी ख़बर: ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे तो ट्रंप छोड़ सकते हैं परमाणु समझौते की शर्त
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वाशिंगटन (RNS)। ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका से एक बड़ी चौंकाने वाली खबर आई है। सूत्रों ने दावा किया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बिना किसी समझौते के पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, ट्रंप की शर्त है कि ईरान को वाणिज्यिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से पूरी तरह खोलना होगा। अभी व्हाइट हाउस और तेहरान से इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान ने शनिवार को होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका से अरबों डॉलर के भुगतान, सैनिकों की वापसी और नाकाबंदी समाप्ति की मांग रखी है।
इन मांगों ने ट्रंप के संघर्ष से बाहर निकलने के प्रयासों को जटिल बना दिया है, क्योंकि अमेरिका जलमार्ग से निर्बाध यातायात की बहाली चाहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पहले भी अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ निजी तौर पर परमाणु कार्यक्रम पर बिना समझौते के युद्ध समाप्ति के विचार को साझा कर चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान की नवीनतम मांगों से संकेत मिलता है कि संघर्ष से पीछे हटने के ट्रंप के विकल्प सीमित हो गए हैं।
दरअसल, ईरान हमलों से होर्मुज को पूरी तरह अवरूद्ध करने में सक्षम है और वाणिज्यिक जहाजों को रोकने से वैश्विक बाजारों पर असर पड़ रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में ईरान की मजबूती दिख रही है।
दूसरी तरफ, ट्रंप की धमकियों के बावजूद भी तेहरान लंबे और भीषण संघर्ष के लिए तैयार दिख रहा है।
ट्रंप का परमाणु समझौते के बगैर पश्चिम एशिया संघर्ष को खत्म करने का बड़ा कारण मध्यावधि चुनाव भी है, जिसमें अब 3 महीने से भी कम समय बचा है।
ट्रंप प्रशासन अमेरिकी जनता को यह बताने का तरीका ढूंढ रहा है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध जीत लिया है।
दरअसल, पेट्रोल की कीमतें, जो फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में काफी अधिक हैं, ट्रंप के लिए चिंता का विषय बन गई है
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स आईआरजीसी ने रविवार को कहा कि वे तब तक जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलेंगे, जब तक अमेरिका उनकी मांगों को मानकर मुआवजे के भुगतान सहित उनकी मांगों की सूची पर सहमत नहीं हो जाता।
आईआरजीसी ने कहा कि उनकी रणनीति नाकाबंदी को बनाए रखना है, और दावा किया कि जब तक दुश्मन हमारी सभी शर्तें स्वीकार नहीं कर लेता… तब तक यह जलडमरूमध्य हमारे लिए सिर्फ एक जलमार्ग नहीं बल्कि वास्तव में एक युद्धक्षेत्र है।

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