शुरूआत: लंबे इंतजार बाद टिहरी झील में फिर शुरू हुआ मत्स्य आखेट

शुरूआत: लंबे इंतजार बाद टिहरी झील में फिर शुरू हुआ मत्स्य आखेट
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नई टिहरी। लंबे इंतजार के बाद टिहरी बांध की झील में फिर से मत्स्य आखेट शुरू गया हैं। अब झील में केज कल्चर (जालीदार पिंजरों में मछली पालन) की भी तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार ने देहरादून की स्काईपी टेक कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ 10 वर्षों के लिए अनुबंध किया है। कंपनी झील में मत्स्य आखेट के साथ ही 1200 स्थानों पर जालीदार पिंजरों के माध्यम से मछली पालन भी करेगी। इससे झील में सालभर पर्याप्त मात्रा में मछली उपलब्ध रहने की उम्मीद जताई जा रही है। करीब 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली टिहरी बांध की झील प्रदेश की सबसे बड़ी जलाशयों में से एक है। यहां व्यावसायिक मत्स्य पालन और आखेट के लिए सरकार ने निविदा प्रक्रिया के माध्यम से अनुबंध किया है। कंपनी ने झील में अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। वर्तमान में औसतन 70 से 80 क्विंटल मछली प्रतिमाह उपलब्ध हो रही है। झील में करीब 1200 स्थानों पर केज कल्चर स्थापित किया जा रहा है। केज कल्चर के तहत झील में पानी के भीतर जालीदार पिंजरे लगाए जाते हैं। उनमें मछलियों का पालन किया जाता है। इससे प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों पर दबाव कम पड़ता है। टिहरी झील में कॉमन कार्प, रोहू, कतला और नैनी प्रजाति की मछलियां प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
केज कल्चर शुरू होने से प्रजातियों के उत्पादन में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। कंपनी को इस कार्य के लिए प्रदेश सरकार को प्रतिवर्ष 60 लाख का राजस्व शुल्क भी देना होगा। वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक आमोद नौटियाल ने बताया कि भागीरथी और भिलंगना घाटी क्षेत्र में पीपलडाली और डोबरा में दो आउटलेट एवं स्टोर स्थापित किए गए हैं।
केंद्रों से स्थानीय बाजारों, होटलों और रेस्टोरेंटों के अलावा गाजीपुर और किच्छा मंडियों तक मछली की आपूर्ति की जा रही है। टिहरी झील में वर्ष 2010-11 से टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से व्यावसायिक मत्स्य आखेट शुरू किया गया था। एक साल पूर्व कार्यरत कंपनी ने इसे घाटे का सौदा बताकर काम छोड़ दिया था।

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