ख़ास ख़बर: ‘अगर हाथ-पैर काट दिए जाएं तो शायद लोग कानून का पालन करना सीख जाएं’, कर्नाटक हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

ख़ास ख़बर: ‘अगर हाथ-पैर काट दिए जाएं तो शायद लोग कानून का पालन करना सीख जाएं’, कर्नाटक हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
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बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले की सुनवाई के दौरान अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कठोर दंड व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हुए सख्त टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी और कड़ी कार्रवाई नहीं होने के कारण कानून का भय कम होता जा रहा है और यही वजह है कि गंभीर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।
न्यायमूर्ति आर. नटराज ने 23 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अपराधों को रोकने के लिए कानून का सख्ती से पालन और दोषियों को कड़ी सजा मिलना आवश्यक है। आरोपी छात्र अप्रैल की शुरुआत से न्यायिक हिरासत में है और उस पर वर्ष 2023 में अपनी पूर्व सहपाठी के साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप है।
‘लोकतंत्र का फायदा उठाते हैं अपराधी’
जस्टिस आर. नटराज ने छात्र की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, कानून के दांत इसलिए टूट गए हैं, क्योंकि हम अपराधियों से सख्ती से नहीं निपटते। अगर आप किसी का हाथ या पैर काट दें तो शायद लोग कानून का पालन करना सीख जाएंगे। क्योंकि हमारा देश एक लोकतंत्र है इसलिए हर कोई इसका फायदा उठाता है।
अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि गंभीर अपराधों को अंजाम देने वालों के खिलाफ पर्याप्त सख्ती नहीं बरती जाती, जिसके कारण समाज में गलत संदेश जाता है। न्यायमूर्ति ने कुछ पश्चिम एशियाई देशों में लागू कठोर दंड व्यवस्थाओं का भी संदर्भ दिया।
वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी छात्र करीब दो महीने से जेल में है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप लगभग तीन वर्ष पुरानी घटनाओं से जुड़े हैं। वकील ने दावा किया कि छात्र निर्दोष है और उसे अनावश्यक रूप से हिरासत में रखा गया है।
इस पर न्यायमूर्ति ने कहा कि कानून की प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है और मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल राहत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जून की तारीख निर्धारित की है।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने महिला को दोस्ती से जुड़ी बातचीत के बहाने एक अपार्टमेंट में बुलाया था, जहां 12 सितंबर 2023 को कथित तौर पर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया। बताया गया है कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से पहले पीड़िता ने राष्ट्रीय महिला आयोग से भी संपर्क किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की टिप्पणियां न्याय व्यवस्था में अपराधों के प्रति बढ़ती चिंता और कठोर दंड की आवश्यकता पर चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आई हैं।

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