मिसाल: कोरोना संकट में छिना रोजगार तो ट्राउट मत्स्य पालन बना नई उम्मीद की किरण
रानीगढ़ पट्टी के दिनेश सिंह चौधरी बने प्रेरणा, सालाना मछली उत्पादन से दस लाख की आमदनी
रुद्रप्रयाग। कोरोना महामारी ने जहां लाखों लोगों का रोजगार छीन लिया, वहीं कुछ लोगों ने इस संकट को अवसर में बदलकर नई मिसाल कायम की। रुद्रप्रयाग जिले की रानीगढ़ पट्टी के लदोली गांव के युवा दिनेश सिंह चौधरी की कहानी इसी साहस, संघर्ष और सफलता का प्रेरणादायक उदाहरण है।
महामारी के दौरान रोजगार छिन जाने के बाद दिनेश सिंह चौधरी ने निराश होने के बजाय अपने गांव की प्राकृतिक परिस्थितियों को समझा और ट्राउट मछली पालन को अपनाने का निर्णय लिया। पहाड़ी क्षेत्र की ठंडी और स्वच्छ जलधाराओं के लिए प्रसिद्ध रुद्रप्रयाग ट्राउट मछली पालन के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। इसी विशेषता को पहचानते हुए उन्होंने मात्र दो छोटे टैंकों से अपने सफर की शुरुआत की।
शुरुआती दौर आसान नहीं था। तकनीकी जानकारी की कमी, सीमित संसाधन और बाजार को लेकर अनिश्चितता जैसी कई चुनौतियां सामने थीं। लेकिन दिनेश के दृढ़ निश्चय और मेहनत ने इन सभी बाधाओं को पीछे छोड़ दिया। इस दौरान मत्स्य विभाग रुद्रप्रयाग का सहयोग उनके लिए संबल बना। विभाग से मिली तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता ने उनके छोटे प्रयास को मजबूत आधार प्रदान किया।
धीरे-धीरे दिनेश सिंह चौधरी का यह प्रयास एक सफल उद्यम में बदलता गया। आज वे न केवल ट्राउट मछली उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि अपने फार्म में ट्राउट मछली की हैचरी भी स्थापित कर चुके हैं। यह उपलब्धि उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है, क्योंकि अब वे मछलियों के बीज (फिंगरलिंग) स्वयं तैयार कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने लगभग एक लाख ट्राउट मछलियों के बच्चों का उत्पादन कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
दिनेश सिंह चौधरी की सफलता का प्रभाव अब पूरे क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। रुद्रप्रयाग जिले के कई युवा और किसान उनकी हैचरी से मछलियों के बीज खरीदकर ट्राउट मत्स्य पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और पलायन की समस्या को भी कम करने में मदद मिल रही है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में ट्राउट मत्स्य पालन एक स्थायी और लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है। कम भूमि में अधिक उत्पादन, ऊंचा बाजार मूल्य और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण यह व्यवसाय युवाओं के लिए आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है।
दिनेश सिंह चौधरी की यह कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता, नवाचार और संघर्ष की मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता की नई राहें बनाई जा सकती हैं। आज लदोली गांव का यह युवा पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुका है। उनका संदेश साफ है कि “रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन जरूरी नहीं, यदि हम अपने गांव की संभावनाओं को पहचान लें।
स्थानीय युवाओं को दिया रोजगार
रानीगढ़ पट्टी के लदोली गांव निवासी दिनेश सिंह चौधरी सालभर में बीस कुंतल ट्राउट मछली उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उन्हें चार से पांच लाख की आमदनी हो जाती है। इसके अलावा फार्म में मछलियों के बीज (फिंगरलिंग) स्वयं तैयार कर रहे हैं। उन्होंने लगभग एक लाख ट्राउट मछलियों के बच्चों का उत्पादन कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिससे उन्हें लगभग पांच लाख तक की आमदनी हो जाएगी। सालभर में मछली उत्पादन से युवा दिनेश सिंह चौधरी लगभग दस लाख तक की कमाई कर रहे हैं। उन्होंने अपने फार्म में तीन युवाओं को भी रोजगार दिया है। गौरतलब है कि ट्राउट मछली को हार्ट के लिए फायदेमंद माना जाता है।

