हालात : दो दिन बाद खुले चंद्र मोहन सिंह नेगी राजकीय अस्पताल में लगी मरीजों की कतार

हालात : दो दिन बाद खुले चंद्र मोहन सिंह नेगी राजकीय अस्पताल में लगी मरीजों की कतार
Spread the love

कोटद्वार। होली पर सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल और ज्यादा समय तक भीगे रहने से अस्वस्थ हुए लोगों की अस्पताल में भीड़ रही। वहीं, बेस अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कई लोग नशा करके पहुंचे लेकिन पुलिसकर्मियों के नहीं होने पर स्वास्थ्य कर्मियों को दिक्कतें झेलनी पड़ी। दो दिन के अवकाश के बाद बृहस्पतिवार सुबह बेस अस्पताल खुला तो मरीजों की अच्छी भीड़ रही। मरीजों में कई बदन, सिर और पेटदर्द में गड़बड़ी होने की समस्या लेकर पहुंचे थे। फिजिशियन डॉ. जेसी ध्यानी ने अकेले ही करीब दो सौ मरीजों की जांच की। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुसुमा रावत की ओपीडी में भी बीमार हुए बच्चों की भीड़ रही। चिकित्सकों ने मरीजों और तीमारदारों को बताया कि मौसम में अभी भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सुबह व शाम के समय मौसम ठंडा हो रहा है। मौसम से तालमेल बनाकर खानपान और रहन-सहन को लचीला बनाना ही बेहतर होगा। इसके अलावा कई मरीज त्वचा संबंधी समस्या लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन त्वचा विशेषज्ञ नहीं होने के कारण अन्य चिकित्सकों से ही प्राथमिक उपचार लेकर लौट गए। वहीं, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड परिसर में स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से सवालिया निशान लगा। होली पर कई लोग शराब के नशे में धुत होकर वार्ड में पहुंचे और शोर करने लगे। नशे में तो एक व्यक्ति इमरजेंसी वार्ड में उत्पात मचाकर फर्श पर ही लेट गया। उसे बमुश्किल उठाया जा सका।
मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे:  पौड़ी। बदलते मौसम के साथ ही बच्चे वायरल बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में बाल रोग ओपीडी 50 की पार रही। दिन में जहां गर्मी बढ़ गई है वहीं सुबह और शाम को ठंड के चलते मौसमी बीमारियां बढ़ गई हैं। बीमारियों की चपेट में आने से बच्चे बुखार, खांसी, उल्टी, दस्त व टायफाइड से बीमार पड़ने लगे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा उपाध्याय ने बताया कि गर्मी शुरू होते ही बच्चों में इस प्रकार की बीमारियां आम हो गई हैं। ऐसे मौसम में उन्होंने बच्चों का विशेष रूप से ध्यान रखने को कहा। बताया कि बच्चों को मिठाइयां, गुजिया व बाहर का तला भोजन से खाने से बचाना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से संतुलित भोजन और साफ सफाई रखनी चाहिए।

Parvatanchal