सावधान: हार्ट अटैक के बाद लापरवाही नहीं बल्कि सतर्कता है ज़िंदगी की कुंजी
हरिद्वार। हार्ट अटैक से बच जाना जीवन की नाज़ुकता का गहरा एहसास कराता है, लेकिन यह सेहत को दोबारा सँवारने का एक सुनहरा मौका भी देता है। अक्सर मरीज़ यह समझ लेते हैं कि इलाज के बाद खतरा टल गया है, जबकि सच्चाई यह है कि जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। अच्छी बात यह है कि सही जानकारी और सही कदमों के साथ दूसरे हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हार्ट अटैक, जिसे मायोकार्डियल इंफार्क्शन कहा जाता है, दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुँचाता है और रक्त नलिकाओं के काम करने के तरीके को भी बदल देता है। इलाज सफल होने के बाद भी शरीर कुछ समय तक संवेदनशील रहता है। 6,800 से अधिक हार्ट अटैक सर्वाइवर्स पर किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि एक साल के भीतर करीब 3.8 प्रतिशत लोगों को दोबारा हार्ट अटैक हुआ, जबकि लगभग 24 प्रतिशत में नई हार्ट फेल्योर की समस्या विकसित हो गई। यह आंकड़े बताते हैं कि दूसरा हार्ट अटैक रोकना केवल धमनियों को खुला रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल की कमजोरी को बढ़ने से रोकना भी उतना ही ज़रूरी है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के कार्डियक साइंसेज़ विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया, दूसरे हार्ट अटैक से बचाव की पहली और सबसे अहम सीढ़ी है दवाइयों को नियमित और सही तरीके से लेना। हार्ट अटैक के बाद डॉक्टर खून के थक्के बनने से रोकने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, प्लाक को स्थिर रखने और दिल पर पड़ने वाले दबाव को घटाने के लिए दवाइयों का एक संयोजन देते हैं। इनमें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाली दवाइयाँ शामिल होती हैं। हर दवा का अपना एक खास उद्देश्य होता है, इसलिए डोज़ छोड़ना या अनियमित लेना दूसरे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है।
दवाइयों के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव दूसरा मज़बूत स्तंभ है। नियमित व्यायाम दिल को मजबूत बनाता हैकृहर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की मध्यम गतिविधि, जैसे तेज़ चाल से चलना, रक्त प्रवाह और मनोदशा दोनों में सुधार लाती है। खान-पान में फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज, नट्स, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल करें, जबकि तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक और मीठे पेय सीमित रखें। वज़न संतुलित रखना भी ज़रूरी है, क्योंकि थोड़ी-सी वज़न कमी से भी ब्लड प्रेशर और दिल पर दबाव घटता है। धूम्रपान पूरी तरह छोड़ना सबसे प्रभावी कदमों में से एक है, वहीं शराब का सीमित सेवन और नशे से दूरी भी दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को सुरक्षित रखती है।

