हालात: दरकते गंगोत्री हाईवे ने बढ़ाई प्रशासन और लोगों की मुश्किलें, नलूणा में मार्ग बंद
उत्तरकाशी। इस बरसाती सीजन में दरकता गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग आपदा से बेहाल नजर आ रहा है। जगह-जगह भूधंसाव और भूस्खलन से गंगोत्री हाईवे पर आवागमन जोखिम भरा होने के साथ ही गंगाघाटी क्षेत्र में भारी मुश्किल हालात का कारण बना है। खासकर आपदा के 21 दिन बाद भी धराली पहुंच से दूर है। इसके चलते गंगोत्री धाम की यात्रा भी ठप पड़ी है। नलूणा में पिछले दो दिन से मार्ग भारी भूस्खलन होने के कारण बंद है। बरसाती सीजन में गंगोत्री राजमार्ग पर भूस्खलन और भूधंसाव ने जमकर कहर बरपाया। हर्षिल-धराली में तेलगाड़ और खीर गंगा की बाढ़ भी हाईवे की बदहाली का कारण बना है। इस बार धरासू से लेकर हर्षिल तक गंगोत्री हाईवे पर लैंडस्लाइड की ऐसी मार पड़ी कि अब तक भी स्थिति पटरी पर नहीं लौट सकी। डबरानी से लेकर सोनगाड़ के बीच बंद सड़क ने गंगोत्री हाईवे पर यातायात को सबसे अधिक प्रभावित रखा। करीब तीन से चार किमी के दायरे में 600 मीटर तक सड़क वॉशआउट होने के कारण राजमार्ग पिछले 18 दिन बाद खुला। हाईवे पर डेंजर जोन कितने जोखिम भरे हैं, इसका उदाहरण डबरानी है, जहां गत 19 अगस्त को सुक्की गांव के दो युवकों की ऊपर पहाड़ी से बोल्डर गिरने के कारण जान चली गई। सिर्फ यही जोन नहीं बल्कि गंगोत्री राजमार्ग पर धरासू से लेकर धराली तक ऐसे कई जानलेवा डेंजर जोन हैं, जहां हर पल जिंदगी खतरे में रहती है। इनमें हाईवे पर स्थित नालूपानी, रतूड़ीसेरा, बंदरकोट, नेताला, नलूणा, डबरानी, सोनगाड़ आदि सबसे संवेदनशील भूस्खलन प्रभावित जगह हैं। नालूपानी और नलूणा सबसे संवेदनशील है, जहां बिन बारिश भी पहाड़ी से मलबा गिरता रहता है। नलूणा में पिछले दो दिन से मार्ग भारी भूस्खलन होने के कारण बंद है। सड़क मार्ग के बंद होने से लोग परेशानी में है। खासकर आपदाग्रस्त धराली पहुंच से दूर होने के कारण प्रभावितों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही।

