सुनवाई: गल्जवाड़ी ग्रामप्रधान चुनाव विवाद में एसडीएम का आदेश निरस्त, दोबारा सुनवाई होगी

सुनवाई: गल्जवाड़ी ग्रामप्रधान चुनाव विवाद में एसडीएम का आदेश निरस्त, दोबारा सुनवाई होगी
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देहरादून(आरएनएस)।  जिला अदालत ने ग्राम पंचायत गल्जवाड़ी की महिला ग्राम प्रधान के निर्वाचन से जुड़े विवाद में एसडीएम कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया गया। जिला जज हरीश कुमार गोयल की अदालत ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का हवाला देते हुए मामले को दोबारा नए सिरे से सुनवाई और फैसले के लिए एसडीएम कोर्ट को वापस भेज दिया है।हरिकला गल्जवाड़ी की ग्राम प्रधान चुनी गई हैं। उनके इस निर्वाचन को पराजित प्रत्याशी लीला शर्मा ने एक चुनाव याचिका के जरिए चुनौती दी थी। आरोप लगाया गया था कि हरिकला पुन ने वन भूमि पर अवैध कब्जा कर आवासीय मकान बनाया है।
इसलिए उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम के तहत वे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थीं और उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए था। इस पर सुनवाई करते हुए एसडीएम कोर्ट ने 25 मार्च 2026 को प्रधान के खिलाफ आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ हरिकला ने जिला जज की अदालत में सिविल रिवीजन याचिका दायर की थी। मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद जिला जज हरीश कुमार गोयल ने अपने निर्णय में एसडीएम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और मुख्य रूप से दो कारणों से आदेश को रद्द कर दिया। जिला अदालत ने पाया कि एसडीएम का आदेश पूरी तरह से तहसीलदार (सदर) की 11 मार्च 2026 की एक रिपोर्ट पर आधारित था। रिकॉर्ड के अनुसार एसडीएम कोर्ट ने हरिकला पुन को न तो इस रिपोर्ट की प्रति दी और न ही इस पर अपनी आपत्ति या पक्ष रखने का कोई मौका दिया। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना सुने या उसका पक्ष जाने दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने नोट किया कि रिकॉर्ड में जुलाई 2025 की दो पुरानी राजस्व रिपोर्ट भी थीं, जो खसरा नंबर और अतिक्रमण की स्थिति को लेकर मार्च 2026 की रिपोर्ट से बिल्कुल अलग थीं। एसडीएम ने इन विरोधाभासों पर विचार किए बिना और बिना किसी कानूनी सीमांकन के केवल आखिरी रिपोर्ट को सच मान लिया। अदालत ने मामले को वापस भेजते हुए कहा कि एसडीएम कोर्ट को तुरंत 11 मार्च 2026 की तहसीलदार की रिपोर्ट की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए। सभी पक्षों को इस रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने और कानून सम्मत साक्ष्य पेश करने का पूरा अवसर दिया जाए।

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