समस्याः जंगलों पर आदमी का अनाधिकृत कब्जा,जानवर जाए तो कहां जाए
- लगातार बढ़ रहे हैं जंगली जानवरों के हमले
देहरादून। जंगली जानवर और इंसान एक दूसरे की जान के जानी दुश्मन बन बैठे हैं, ऐसे में मानव और वन्य जीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं दोनों के लिए घातक साबित हो रही है। जंगली जानवरों के इलाकों में मनुष्यों की घुसपैठ ने जानवरों को इतना उग्र कर दिया है कि वह इंसान को बर्दाश्त करने के मूड में कतई नहीं हैं और आए दिन लोगों की जान लेने में नहीं हिचक रहे हैं, तो वहीं मनुष्य भी जंगली जानवरों को मौका पड़ने पर बख्शने के मूड में नहीं दिखाई पड़ता है। मसूरी-किमाड़ी मार्ग पर वन गुर्जर बस्ती में खेल रहे 10 साल के बच्चे को गुलदार ने निवाला बना लिया। परिजनों ने बच्चे को गुलदार के मुंह से छीना लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। घटना के बाद मौके पर वन विभाग की टीम गुलदार को पकड़ने के लिए कांबिंग में जुट गई है। बच्चे के शव को देर रात मोर्चरी में रखवाया गया है। कीर्तिनगर विकासखंड में पीछा कर मारे गए गुलदार की कहानी कुछ ऐसी ही दर्दनाक दास्तां बयां करती है, जहां उसको इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।
मानव ने अपने पैर जंगली जानवरों की पनाहगाहों तक पसार लिए है, जिसे लेकर जानवर आतंकित और सहमे हुए दिखाई पड़ते हैं। जंगल में बढ़ती मानवीय गतिविधियां हालात के और बदतर होने की तरफ इशारा करती दिखाई पड़ रही हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊँ मंडलों के पार्वतीय अंचलों सहित मैदानी क्षेत्रों में गुलदार का आतंक जहां लोगों के जेहन में घर कर गया है तो वहीं गुलदार भी मनुष्य को लेकर भयाक्रांत दिखाई पड़ रहा है और अपने क्षेत्र की रखवाली हेतु हर रोज किसी न किसी मनुष्य की बलि ले रहा है। गुलदार जहां पलक झपकते ही लोगों की जान ले रहा है तो वहीं मनुष्य भी गुलदार को मौका पढ़ने पर ढेर करने में एक क्षण का भी विलंब नहीं लगा रहा है। दोनों के बीच चल रहा द्वंद अंतहीन है, जो तब तक चलता रहेगा जब तक दोनों में से किसी एक का अस्तित्व समाप्त नहीं हो जाता। ऐसे में न तो गुलदार हार मानने वाला है और न ही मनुष्य के शांत बैठने के आसार दिखाई पड़ रहे हैं।
गुलदार के पास कुदरत का दिया हुआ अमोघ अस्त्र उसका छलावरण है, जो हर परिस्थिति में प्रकृति की इस नायब कृति को सुरक्षित रखने में प्रायः सफल रहता है, जबकि इंसान अपने दिमाग के दम पर बनाए गए हथियारों और गुलदार को काबू में करने वाली तिकड़म भिड़ाने के सहारे पार पाने की उम्मीद लगाए बैठा है। परंतु तमाम प्रयासों के बावजूद गुलदार अपनी कुदरती नैसर्गिक क्षमता के दम पर मानव के ऊपर भारी पड़ता दिखाई पड़ता है। यहां तक की इस ‘खामोश शिकारी’ को सैकड़ों की भीड़ घेरकर भी काबू करने में विफल साबित हो जाती है, ऐसे में गुलदार अक्सर तभी मारा जाता है, जब वह हताश होकर खुद ही आत्मसमर्पण कर देता है या फिर घायल हो जाता है। वन विभाग के कर्मी तमाम उपकरणों से सज्जित होने के बावजूद भी उसे चिन्हित करने में नाकाम रहते हैं।
गुलदार के इलाका बदलने की प्रवृत्ति भी उसे इंसान से दो या चार नही, बल्कि दस कदम आगे रखती है, जिसके सम्मुख पूरे प्रशिक्षित अमले के समिल्लित प्रयास भी गुलदार को काबू में करने में विफल साबित होते हैं और अंततः जब सारी कोशिशें विफल हो जाती हैं, तो फिर अंतिम और दर्दनाक उपाय के तौर पर गोली मारकर उसे मौत की नींद सुला दिया जाता है, बस यही एकमात्र उपाय मनुष्य के पास अब शेष रह गया है जो इस शिकारी के दुखद अंत का कारण बनता है। एक बेजुबान और निहत्थे जानवर पर लाठी-डंडों और बंदूकों से लैस सैकड़ों लोग भूखे भेड़िए की भांति टूट पड़ते हैं, जिसमें उनका एकमात्र मकसद उसकी जान लेना ही होता है और उनके साथ वह पूरी व्यवस्था भी चट्टान की तरह खड़ी रहती है, जिसके कंधों पर इस जानवर के संरक्षण की जिम्मेदारी है। जंगल में गुलदार के आहार पर जब इंसानों ने डाका डाल दिया हो, तो ऐसे में भूखा जानवर किसे आहार बनाएगा और फिर शिकार की तलाश में निकले गुलदार का आहार तो वही होगा जो उसके सामने आ जाएगा, फिर चाहे वह इंसान ही क्यों न हो, लेकिन अगर गुलदार की तलाश में निकले हथियारबंद मनुष्यों के सामने गुलदार आ जाए तो फिर गुलदार का शिकारी से शिकार बनने का समय आ जाता है, जैसे कि कीर्तिनगर विकासखंड में आतंक का पर्याय बने गुलदार को आखिरकार गोली मारकर ढेर कर दिया गया। इस गुलदार ने दो दिनों के अंदर 9 लोगों पर हमला किया था।
गुलदार को मारने के लिए चार गोलियां चलाई गई थी, जिसमें से चौथी गोली गुलदार को लगी, जिसमें वो ढेर हो गया। वन विभाग के अनुसार गुलदार को आत्मरक्षा में मारा गया। गुलदार ने 22 फरवरी को कीर्तिनगर विकासखंड के नैथाणा और डांग गांव में गुलदार ने पांच महिलाओं पर हमला किया था। गुलदार को मारने के लिए वन विभाग के शूटरों को भी बुलाया गया, जिन्होंने करीब आठ घंटे तक गुलदार का पीछा किया। करीब आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शूटरों ने गुलदार को ढेर किया।

