सख़्त रुख: रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को दिए 5 अहम निर्देश
नई दिल्ली (आरएनएस)। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान नौकरी का झांसा देकर रूस भेजे गए भारतीय नागरिकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि पीड़ित परिवारों को समय पर जानकारी और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि विदेश मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो युद्ध में मारे गए, घायल या लापता भारतीयों के परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखे और उन्हें आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मृत भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए डीएनए मिलान कराया जाए। साथ ही, नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के समक्ष मुआवजा दावा प्रस्तुत करने में विदेश मंत्रालय पीड़ित परिवारों की सहायता करेगा। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी जरूरी जानकारी परिवारों को उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाए।
इसके अलावा राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों को परिवारों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। इसमें मुआवजा दावा दाखिल करना, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराना और पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया में सहयोग शामिल होगा।
यह मामला उन भारतीय युवाओं से जुड़ा है, जिन्हें ट्रैवल एजेंटों ने रूस में नौकरी का लालच देकर भेजा था। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद कई लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया, जहां कुछ की मौत हो गई, कुछ घायल हुए और कई अब भी लापता हैं। इन्हीं परिवारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह विस्तृत निर्देश जारी किए हैं

