शुभारंभ: ‘अधिकारी राजनीति करते हैं…, ये क्या क्राइम रोकेंगे’; अपनी ‘धन्यवाद जनसंवाद यात्रा’ में बोले पूर्व सीएम हरीश रावत
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी ‘धन्यवाद जनसंवाद यात्रा’ के दौरान उत्तराखंड की पुलिस व्यवस्था, अधिकारियों की तैनाती और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रावत ने अपनी यात्रा के दौरान सामने आए एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि उनके काफिले को रास्ते में भटकाया गया और इसके चलते यात्रा के निर्धारित कार्यक्रम में देरी हुई।
रावत के अनुसार, उनकी जनसंवाद यात्रा काशीपुर पहुंची तो उन्हें मुख्य सड़क पर प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसके लिए पुलिया और आरओबी निर्माण का हवाला दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप है कि यात्रा का मार्ग इस तरह प्रभावित हुआ कि काफिला समय पर रामनगर नहीं पहुंच सका। उन्होंने इसे महज यातायात व्यवस्था का विषय न मानते हुए पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े किए।
गृह सचिव और कमिश्नर को पहले दी थी सूचना
हरीश रावत ने कहा कि उन्होंने अपनी यात्रा और कार्यक्रम की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही उपलब्ध करा दी थी। उनका कहना है कि गृह सचिव और कमिश्नर को भी यात्रा के बारे में जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद ऐसी व्यवस्था नहीं की गई, जिससे यात्रा का आवागमन सुचारु रूप से हो सके।
रावत ने आरोप लगाया कि काशीपुर से ही ऐसा घटनाक्रम शुरू हुआ, जिसके कारण उनकी जनसंवाद यात्रा के कार्यक्रम में व्यवधान आया। हालांकि उनके इन आरोपों पर प्रशासन या संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई अलग पक्ष सामने आता है तो वह इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष होगा।
‘अधिकारी राजनीति करते हैं… ये क्या क्राइम रोकेंगे’
पूर्व मुख्यमंत्री ने ऊधमसिंह नगर और नैनीताल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति का मूल उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों की रोकथाम करना और आम लोगों को सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
रावत ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों का ध्यान अपने मूल दायित्वों के बजाय राजनीतिक गतिविधियों और राजनीतिक प्रबंधन से जुड़े कार्यों में अधिक दिखाई देता है। इसी संदर्भ में उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा— “अधिकारी राजनीति करते हैं… धन्य हैं, ये क्या क्राइम रोकेंगे।”
उनका कहना था कि यदि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी राजनीतिक गतिविधियों में उलझे रहेंगे तो अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था जैसे मूल दायित्व प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने पुलिस व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से अलग रखने की जरूरत पर जोर दिया।
पुलिस का मूल काम अपराध रोकना : रावत
हरीश रावत ने कहा कि राज्य में पुलिस का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व कानून-व्यवस्था को मजबूत रखना और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े कार्यों के बजाय अपराध नियंत्रण, जांच, यातायात व्यवस्था, महिला सुरक्षा और आम नागरिकों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
रावत ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों की तैनाती और स्थानांतरण की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी अधिकारी को लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में रहने का अवसर न मिले। उनके मुताबिक लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती से प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो सकते हैं।
डेढ़ साल बाद हो ‘कूलिंग ड्यूटी’
पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के लिए ‘कूलिंग ड्यूटी’ की व्यवस्था का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी को एक ही क्षेत्र में लंबे समय तक तैनात रखने के बजाय निश्चित अवधि के बाद दूसरे क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए।
रावत के अनुसार, अधिकारियों के लिए राज्य के कुछ विशेष क्षेत्रों को कूलिंग ड्यूटी के लिए चिह्नित किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे अधिकारियों को करीब एक से डेढ़ साल के लिए राज्य के सीमांत अथवा दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे एक ओर अधिकारियों को अलग-अलग भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनाती को लेकर उठने वाले सवालों को भी कम किया जा सकेगा।
सीमांत क्षेत्रों में भी पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका
रावत ने सीमांत क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं भी हैं और कई क्षेत्र अत्यंत दुर्गम हैं। ऐसे में सीमांत इलाकों में पुलिस की मौजूदगी केवल सामान्य कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां सुरक्षा व्यवस्था का भी विशेष महत्व है।
उन्होंने सुझाव दिया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कूलिंग ड्यूटी के लिए सीमांत क्षेत्रों को भी विकल्प बनाया जा सकता है। इससे अधिकारियों को राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और वहां कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से सीधे रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
नैनीताल की पुलिस व्यवस्था पर भी चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने नैनीताल जिले की पुलिस व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि नैनीताल की पुलिस का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ नैनीताल संवेदनशील प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था वाले क्षेत्रों में भी शामिल है।
रावत ने कहा कि जिस पुलिस व्यवस्था का अतीत शानदार रहा है, उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर उन्हें चिंता होती है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपेक्षा की कि वह अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करे और आम लोगों के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर भरोसा मजबूत बनाए।
यात्रा को लेकर लगातार सक्रिय हैं हरदा
हरीश रावत इन दिनों उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में ‘धन्यवाद यात्रा’ और ‘जनसंवाद यात्रा’ के माध्यम से लोगों से संपर्क कर रहे हैं। यह सक्रियता ऐसे समय में है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।
यात्रा के दौरान रावत स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक व्यवस्था, केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई, सरकार की नीतियों और राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे भी उठा रहे हैं।
वह अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय लोगों से संवाद कर क्षेत्रीय समस्याओं को समझने और उन्हें राजनीतिक मुद्दों के रूप में सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी इस सक्रियता को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में भी चर्चा बनी हुई है।
हाईकमान की आपत्ति के बावजूद यात्रा जारी
रावत की यात्रा को लेकर कांग्रेस संगठन के भीतर भी चर्चा रही है। हाईकमान की ओर से यात्रा को लेकर कथित तौर पर असहमति, यूं कहें कि आपत्ति जताए जाने के बावजूद रावत लगातार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
उनकी यात्रा में जहां स्थानीय स्तर पर सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़े मुद्दे उठ रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक मुद्दों को भी जगह मिल रही है। रावत अपने संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से सीधे जनता के बीच पहुंचने पर जोर दे रहे हैं।
राजनीतिक संदेश देने की कोशिश
रावत की मौजूदा गतिविधियों को केवल जनसंपर्क कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान जिस तरह वह प्रशासन, कानून-व्यवस्था और सरकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं, उससे इसे राजनीतिक संवाद के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि यात्रा के राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं की अपनी-अपनी व्याख्या है। रावत के समर्थक इसे जनता से सीधा संवाद और जमीनी मुद्दों को सामने लाने का माध्यम बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस संगठन के भीतर उनकी स्वतंत्र राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा जारी है।
फिलहाल रावत ने पुलिस व्यवस्था और अधिकारियों की तैनाती का मुद्दा उठाकर बहस को एक और दिशा दे दी है। उनका जोर इस बात पर है कि पुलिस अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण होनी चाहिए तथा अधिकारियों की तैनाती में लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में बने रहने की स्थिति से बचने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

