विरोध: वीबी-रामजी के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरा प्रधान संगठन, शुरु किया अनिश्चितकालीन धरना  

विरोध: वीबी-रामजी के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरा प्रधान संगठन, शुरु किया अनिश्चितकालीन धरना  
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विकासनगर(आरएनएस)।  प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड की दस सूत्रीय मांगों का अब तक निराकरण नहीं होने से ग्राम प्रधानों में रोष है। पछुवादून के चकराता, कालसी, विहासनगर और सहसपुर ब्लॉक प्रधान संगठन ने बुधवार से ब्लॉक मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया है। इससे पूर्व प्रधान संगठन बीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज चुका है। सहसपुर ब्लॉक मुख्यालय में धरने का नेतृत्व कर रहे प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष शुभम मल्ल ने कहा कि पिछले तीन माह से संगठन लगातार सरकार के समक्ष अपना दस सूत्रीय मांगपत्र रखता आ रहा है, लेकिन अभी तक मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।इससे प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों में नाराजगी बढ़ रही है। संगठन की प्रमुख मांगों में ग्राम प्रधानों का न्यूनतम मानदेय 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने तथा ग्राम पंचायत वार्ड सदस्यों को प्रत्येक खुली बैठक में प्रतिभाग करने पर मानदेय देने की मांग शामिल है। इसके साथ ही वीबी-जी राम जी योजना में श्रमिकों की उपस्थिति को ऑफलाइन करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने में दिक्कत होती है। साथ ही अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 600 और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन करने की मांग उठाई गई है।कालसी ब्लॉक मुख्यालय में संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष चरण सिंह ने कहा कि राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त की धनराशि को ग्राम पंचायतों की जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाने, जिला योजना में ग्राम पंचायतों की खुली बैठक से प्रस्ताव पारित कराने तथा जिला योजना की बैठकों में प्रधान संगठन को नामित सदस्य के रूप में शामिल करने की मांग की है। ज्ञापन में पंचायतीराज एक्ट में पारित सभी 29 विभागों को शीघ्र ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने, विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि की व्यवस्था करने तथा ग्राम पंचायतों में स्वीकृत 10 लाख रुपये तक के कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाए जाने की मांग भी की गई है। इसके अलावा ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य और जीवन बीमा कराने, प्रधानमंत्री आवास प्लस सर्वे-2024 में नाम होने के बावजूद प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं किए गए पात्र लाभार्थियों के नाम आवास की प्राथमिकता सूची में जोड़ने और 16वें वित्त की नई गाइडलाइन के तहत ग्राम पंचायतों पर परिवारों से 100 रुपये प्रतिमाह टैक्स लगाने की बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई है। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों का निराकरण नहीं होने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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