विधानसभा सत्र: दो दिन की पिकनिक, करोड़ों का खर्चा, चर्चा को निगल गई स्पीकर की जिद
भराड़ीसैंण। कुछ फिल्मों का क्लाइमेक्स आम जनता को पहले ही पता होता है । उत्तराखण्ड विधानसभा के सत्र का क्या अंजाम होगा। यह भी जनता पहले ही सुना देती है। आखिर 25 साल से यही ट्रेलर जो देख रहे हैं। 19 और 20 अगस्त को भराड़ीसैंण के विधानभवन में सिर्फ दो घण्टे चालीस मिनट तक चले विधानसभा सत्र में विपक्ष अपने मुद्दों पर चिल्लाता रहा। और सत्ता पक्ष का काम आसान हो गया।
22 अगस्त तक चलने वाला विधानसभा सत्र 20 अगस्त की दोपहर में ही समाप्त हो गया। विपक्ष पहले दिन से ही आपदा व कानून व्यवस्था पर नियम 310 के तहत चर्चा कराए जाने की मांग करता रहा। वेल में विपक्ष ने कागज फाड़े। माइक हिलाए। वोट चोरी समेत तानाशाह सरकार के जोर जोर से नारे लगाए। यही नहीं, पहले दिन चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य व प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने विधानभवन के मंडप के अंदर ही गद्दे, रजाई डालकर ऐतिहासिक रात बिताई।
इस सत्र का सबसे गम्भीर पहलू यह रहा कि कांग्रेस के तात्कालिक व मौजूं सवाल (आपदा व कानून व्यवस्था) पर स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी टस से मस नहीं हुई। धराली-हर्षिल की जानलेवा आपदा पूरे देश ने देखी। और नैनीताल का अपहरण कांड व बेतालघाट की फायरिंग भी पूरे देश की नजरों में आई। इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का सख्त लहजा भी सुर्खियों में रहा। उम्मीद यह जताई जा रही थी कि नियम 310 के तहत स्पीकर कम से कम गम्भीर आपदा पर चर्चा की मांग स्वीकार करेंगी। आपदा पर बहस होने पर कई पीड़ितों से जुड़े अनछुए पहलू सामने आते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मात्र डेढ़ दिन के गैरसैंण सत्र को लेकर यह भी सवाल उठ रहे है कि इससे अच्छा तो दून में ही कर लेते। इतने भारी खर्चे पर पूरी सरकारी मशीनरी को गैरसैंण क्यों ले जाया गया।
बहरहाल, डेढ़ दिनी सत्र के पहले दिन 1 घन्टा 45 मिनट और दूसरे दिन 20 अगस्त को
55 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली। इन डेढ़ दिन में कई बार सदन स्थगित हुआ। कुल 2 घण्टे चालीस मिनट सदन चला। कोई प्रश्नकाल नहीं। कोई सवाल जवाब नहीं। शोरगुल के बीच नये संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल की भी परीक्षा नहीं हो पाई। इस गतिरोध का लाभ उठाते हुए पूर्व की तरह इस बार भी सत्ता पक्ष ने हो हल्ले के बीच पांच हजार करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट और नौ विधेयक पास करवा लिए। नारेबाजी के बीच अन्य बिजनेस भी फ़टाफ़ट निपटा लिए गए। भराड़ीसैंण के अति लघु विधानसभा सत्र के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो चुका है। सोशल मीडिया में भाजपा-कांग्रेस के बीच मैच फिक्स की संभावना भी खुल कर जताई जा रही है। सत्र की समाप्ति के बाद हवाई व सड़क मार्ग से बचते बचाते अपने अपने ठौर पर लौटने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। लेकिन वही पुराने सवाल एक बार फिर पहाड़ी मोड़ पर अटके हुए हैं।
बीते 25 साल में प्रदेश के बजट का आकार 25 गुना बढ़ चुका है। माननीयों के वेतन-भत्ते व सुविधाओं का दायरा भी फैलता जा रहा है। इन 25 सालों में कुछ अगर सिकुड़ा है तो वो विधानसभा के अंदर बहस व चर्चा का दायरा।

