लाठीचार्ज कांड: गढ़वाल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग, विभिन्न संगठनों ने गवर्नर को प्रेषित किया ज्ञापन
दोषी अधिकारियों को दंडित करने की भी उठाई मांग
देहरादून। अब जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बेरोजगारों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर गलती स्वीकार करते हुए बेरोजगारों पर लगे झूठे मुकदमों को वापस लेने की विधानसभा सत्र के दौरान घोषणा कर दी है, ऐसे में लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्यवाही होनी चाहिए तथा इस संदर्भ में गढ़वाल कमीश्नर की एकतरफा रिपोर्ट को अविलंब निरस्त किया जाना चाहिए। सभी शीर्षस्थ अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित की जानी चाहिए, जो सही मायनों में इस घटना के लिये जिम्मेदार हैं। इसी संदर्भ में आज विभिन्न राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा ट्रेड यूनियनों ने महामहिम राज्यपाल को सात सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत कर उस पर अविलंब कार्रवाई करने की मांग की है।

ज्ञापन इस प्रकार है-
सेवामें ,
महामहिम राज्यपाल जी
उत्तराखंड शासन, देहरादून ।
विषय :- बेरोजगारों पर बर्बर लाठीचार्ज की गढ़वाल कमीश्नर जांच रिर्पोट अनुचित।
महामहिम ,
हम संयुक्त विपक्षी दल एवं जनसंगठन बेरोजगारों के मुद्दे एवं पुलिस दमन पर विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित कमिश्नर गढ़वाल की रिपोर्ट पर असन्तोष व्यक्त करते हुये तत्काल रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग करते हैं ।
महामहिम , कमीश्नर गढ़वाल की रिपोर्ट न केवल एकतरफा है ,अपितु लाठीचार्ज के लिये दोषी बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश है। लाठीचार्ज के मामले में छोटे कर्मचारियों को दोषी ठहराकर दंडित किया गया है, जबकि बेरोजगारों पर लाठीचार्ज एवं अभद्रता के लिए बड़े अधिकारी सीधेतौर पर दोषी हैं।
हम प्रमुख विपक्षीदल एवं जनसंगठन पुनः अपनी मांगों को दोहराते हुए आपसे अनुरोध करना चाहते हैं कि :-
(1) बेरोजगारों की सभी न्यायोचित मांगों को पूरा किया जाए।
(2) पुलिस दमन की जांच हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से करवाई जाए व सभी झूठे मुकदमे वापस लिये जाएं।
(3) दोषी पुलिस अधिकारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित हो, जिनमें एसएसपी देहरादून एवं एसडीएम सदर आदि प्रमुख हैं।
(4) यूकेएसएसएससी के अध्यक्ष मार्तोलिया को हटाया जाए।
(5) भर्ती धाधंलियों की सीबीआई जांच हो।
(6) गांधी पार्क एवं शहर के मध्य आंदोलनों एवं जलूसों पर प्रतिबन्ध हटाया जाए।
(7) कमिश्नर गढ़वाल की शासन को भेजी गई रिपोर्ट को अविलंब निरस्त किया जाए।
आशा है कि उपरोक्त बिन्दुओं पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे तथा कृत कार्यवाही से भी अवगत कराने की कृपा करेंगे।
आदर सहित
भवदीय-
कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम सीपीआई (माले), यूकेडी ,राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी, सपा,जेडीएस
इंसानियत मंच, महिला मंच, महिला समिति, अभिवाहक संघ, किसान सभा,पीपुल्स फोरम, एस एफ आई , छात्र संघ डीएवी, आंदोलनकारी संयुक्त मंच, चेतना मंच, पीपुल्स साइंस, जनसंवाद, जन सरोकार, राष्ट्रीय पहाड़ी पार्टी नेगी, सीटू ,एटक एवं इंटक।

ज्ञापन में सीपीएम के सुरेंद्र सिंह सजवाण ,सीपीआई के गिरधर पण्डित ,माले के इन्द्रेश मैखुरी ,यूकेडी क् उत्तमसिंह ,राष्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी के नवनीत गुंसाई ,महिला मंच की निर्मला बिष्ट ,महिला समिति की इन्दुनौडियाल ,अभिवाहक संघ की उर्मिला, किसान सभा के गंगाधर नौटियाल ,पीपुल्स फोरम के जयकृत कंडवाल, एस एफ आई के हिमांशु चौहान, छात्र संघ की सोनाली,चेतना आन्दोलन के गणेशन, पीपुल्स साइंस मूवमेंट के विजय भट्ट ,जनसंवाद के सतीश धौलाखंडी ,जनसरोकार से त्रिलोचन भट्ट ,पहाड़ी पार्टी से नेगी ,सीटू से लेखराज ,एटक से अशोक शर्मा, इन्टक के पंकज क्षेत्री के अलावा ,राजेन्द्र पुरोहित, अनन्त आकाश ,दमयंती नेगी ,एस एस रजवार ,कमरूद्दीन ,नुरैशा ,नितिन मलेठा ,प्रेंमसिंह दानू ,अभिषेक भंडारी ,बालेश बवानिया ,शम्भु प्रसाद म़मगाई ,भगवन्त पयाल व सुधा देवली आदि के हस्ताक्षर शामिल हैं।

